प्रदूषण की मार, अस्पतालों में पहुंच रहे दो हजार से ज्यादा बीमार
बुलंदशहर। दिवाली के बाद से शहर की हवा प्रदूषित हुई तो इसका असर स्वस्थ लोगों पर भी दिखाई देना शुरू हो गया है। मंगलवार को जनपद का एक्यूआई 388 दर्ज किया गया। जिला अस्पताल में जहां प्रतिदिन प्रदूषण जनित रोगों से ग्रसित मरीज उपचार एवं परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में औसतन 1400 मरीज तो निजी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब दो हजार मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 1500 से अधिक मरीज जुकाम और खांसी के हैं। वहीं 800 से अधिक मरीज अस्थमा व अन्य लक्षण के पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद जिले में प्रदूषण रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
दिवाली से पूर्व जिले में वायु प्रदूषण का स्तर 300 के करीब था। वहीं, प्रतिबंध के बावजूद आतिशबाजी छोड़े जाने से प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया। इससे जनपद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा। लोग धूल और धुंए का शिकार होने लगे हैं। अधिकांश मरीजों ने नाक में खुजली, गले में खराश और आंखों में जलन की समस्या बताई। वहीं सांस, दमा और क्षय रोगियों की बीमारी बढ़ गई है।
खांसी से लोगों का बुरा हाल
आईएमए के सचिव डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि पहले उनके यहां 10 से 12 मरीज नजला-खांसी और जुकाम आदि के आते थे। अब यह संख्या 20 से अधिक होने लगी है। अधिकांश मरीज जुकाम-खांसी के साथ सीने में जकड़न से परेशान हैं। कुछ खांसी लगातार होने से ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। जिलेभर के पंजीकृत निजी अस्पतालों में दो हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं। इनमें अस्थमा के मरीज भी शामिल हैं। सभी को प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनने और अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
बच्चे भी हो रहे प्रदूषण का शिकार
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि वायु प्रदूषण से बच्चे की इम्युनिटी पर भी असर पड़ रहा है। जिससे बच्चे सांस लेने में परेशानी होने के साथ एलर्जी और खांसी का शिकार हो रहे है। ऐसे में बच्चों को बाहर न खेलने दे। अगर कोई बच्चा दमा से पीड़ित है तो उसकी दवा बंद न करें। शाम के समय बच्चों को गर्म पानी से भाप दिलाना अधिक फायदेमंद रहेगा।
पीएम 10 के साथ पीएम 2.5 बढ़ने से अधिक खतरा
पीएम 10 न्यूनतम जहां 169 है तो अधिकतम 500 तक पहुंच रहा है। मंगलवार को औसतन पीएम 10 - 385 रहा। जबकि, पीएम 2.5 न्यूनतम 148 तो अधिकतम 479 तक पहुंच रहा है और मंगलवार को औसतन 330 रहा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पीएम 10 का स्तर 100 से अधिक होने पर स्वास्थ्य पर अधिक असर डालता है। प्रदूषण की वजह से वातावरण में धुंध है।
जरूरी है ये सावधानियां
- चौराहों पर बेहतर किया जाए यातायात प्रबंधन
- चौराहों पर ठहराव के दौरान बंद रखें वाहन का इंजन
- धूल भरी और निर्माणाधीन सड़कों पर नियमित हो जल का छिड़काव
- चौराहों पर किया जाए फव्वारों का संचालन
- सांस के मरीज सुबह-शाम टहलने से बनाएं दूरी
- घर से बाहर निकलते समय मुंह और नाक को ढककर रखें
- सांस की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह ले
पिछले पांच दिन का एक्यूआई
दिन/तारीख एक्यूआई
चार नवंबर 386
पांच नवंबर 444
छह नवंबर 433
सात नवंबर 424
आठ नवंबर 397
नौ नवंबर 388
हवा का हाल
प्रदूषण की स्थिति न्यूनतम सामान्य अधिकतम
एनओ 2 26 74 114
एनएस 3 07 12 17
एसओ 2 19 31 52
ओजोन 02 129 190
सीओ 44 68 108
पीएम 10 169 384 500
पीएम 2.5 148 326 479
सभी आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मी. में हैं।
मौसम में बदलाव, हवा न चलने के चलते एक्यूआई में बढ़ोत्तरी हुई है। साथ ही आतिशबाजी से भी एक्यूआई बढ़ी। धुआं फैलाने वाली फैक्ट्री और कारखानों पर निगरानी की जा रही है। साथ ही कुछ स्थानों पर पानी का छिड़काव कराना शुरू कर दिया है। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी