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Bulandshahar News: बस चालकों की हड़ताल से पूरे दिन सड़कों पर भटकते रहे यात्री

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बुलंदशहर/खुर्जा/सिकंदराबाद/नरौरा। चालकों के लिए बनाए नए कानून के विरोध में रोडवेज, निजी बस चालकों के साथ ट्रक चालक भी सोमवार को हड़ताल पर रहे। बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद डिपो की 194 बसों में से केवल 15 का ही संचालन हुआ। इससे पूरे दिन यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बस अड्डों, मुख्य चौक-चौराहों पर यात्री बसों का इंतजार करते नजर आए। हड़ताली चालकों ने सवारी ढो रहे ऑटो चालकों को भी पीटकर भगा दिया।
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बुलंदशहर रोडवेज बस अड्डे से डिपो की प्रतिदिन 60 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं। रविवार देर रात बस अड्डे पर कौशांबी व गाजियाबाद डिपो की अनुबंधित बसें भी खड़ी हो गई थीं। सुबह बस चालकों ने बस निकलने से इन्कार कर दिया। उन्हें देख अन्य बसों के चालकों ने भी मना कर दिया। इससे पहले यहां से रवाना की गई अजमेर जाने वाली बस गभाना से और देहरादून जाने वाली बस मेरठ से वापस लौट आई। इसके बाद एआरएम परमानंद ने यात्रियों की संख्या के अनुसार 13 बसों को दिल्ली व अनूपशहर के लिए रवाना किया। इसमें नौ बसें परिवहन निगम की और चार बसें अनुबंधित शामिल रहीं। सिकंदराबाद में 64 में से एक बस ही कौशांबी के लिए संचालित हो सकी। खुर्जा डिपो की 70 बसों में से केवल एक ही बस दिल्ली के लिए शाम को संचालित हुई।
चालकों की बेमियादी हड़ताल शुरू करने से परिवहन निगम के अफसर मौके पर पहुंचे और चालकों से वार्ता की। करीब 12 बजे कुछ बसों का संचालन कराया। इसके बाद चालकों ने फिर से विरोध शुरू कर दिया। बुलंदशहर और खुर्जा बस स्टैंड पर कई यात्रियों को पांच से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कुछ यात्री घर वापस लौट गए। खानपुर, औरंगाबाद, अनूपशहर, स्याना, डिबाई आदि जगह भी यात्रियों को परेशानियां हुई। खुर्जा में ऑटो से सवारी ढो रहे चालकों को हड़तालियों ने पीट दिया। उनका कहना था कि कानून सबके के लिए बराबर है। हड़ताल में सभी चालकों को सहयोग करना चाहिए। खुर्जा में ई-रिक्शा चालकों को भी नहीं चलने दिया गया।
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गैर जनपदों को जाने वाले यात्रियों को हुई परेशानी
नगर के दोनों रोडवेज बस अड्डे से नोएडा, फरीदाबाद, मेरठ, हापुड़, आगरा, हरिद्वार, लखनऊ, बदायूं, अलीगढ़ समेत अन्य जनपदों के बसें रवाना होती हैं। सोमवार को इनका संचालन बंद रहा। रोडवेज की बसें नहीं मिलने पर निजी बस व अन्य वाहन की तलाश में लोग अन्य स्थानो पर पहुंचे तो वहां भी उन्हें कोई सवारी वाहन नहीं मिला।

भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे चालक

निजी बस संचालक पप्पू सिंह व मुन्ना ने बताया कि चालक प्रतिदिन 300 से 400 रुपये कमाते हैं। यदि हादसे में इस तरह से जुर्माना और सजा होगी तो इनका परिवार भुखमरी के कगार पर आ जाएगा। पन्नी नगर शुगर मिल के पास ट्रक चालक महावीर, विजयवीर, गुलजार, सज्जन, दिनेश और फरमुद्दीन आदि ने भी नए कानून को लेकर विरोध जताया।




काम पर जाने के लिए सुबह आठ बजे से एक बजे तक बस के इंतजार में बैठा रहा। बस चली नहीं। ऑटो को हड़ताली चालकों ने जाने नहीं दिया, ऐसे में वापस घर लौटना पड़ा। - रवि, निवासी अलीगढ़
दिल्ली निवासी रिश्तेदार के यहां जाना था। तीन घंटे से बस अड्डा व उसके आस-पास चक्कर काटा। कोई वाहन नहीं मिला। ई-रिक्शा व ऑटो को भी नहीं चलने दिया गया। - महेंद्री, निवासी पंचगईं गांव

बच्चे की तबीयत खराब है। सुबह नौ बजे घर से निकली थी। एक बजे बड़ी मुश्किल से खुर्जा तक पहुंची। बस अड्डा पहुंचने पर चालक को भगा दिया गया। वहां से पैदल ही अस्पताल जाना पड़ा। - निशा, निवासी दौदूपुर गांव


यात्रियों की परेशानी को देखते हुए कुछ बस संचालकों से बात करके 13 बसों को दिल्ली व अनूपशहर के लिए भेजा गया। इससे काफी संख्या में यात्रियों को सुविधा हुई। - परमानंद, एआरएम बुलंदशहर डिपो


पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता के पुराने सड़क दुर्घटना कानून के तहत यदि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की जान चली जाती तो संबंधित आरोपी चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया जाता था। इसमें अधिकतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान था। यह जमानती धारा थी। जिसमें बाहर से बाहर जमानत का भी प्रावधान था।

नया कानून
अधिवक्ता पुनीत कुमार राघव ने बताया कि नए भारतीय न्याय संहिता में सड़क दुर्घटना कानून के तहत सड़क दुर्घटना में सजा का प्रावधान दो तरह से किया गया है। पहला प्रावधान है.. यदि वाहन चालक सड़क दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो जाता है तो उसे दस वर्ष का कारावास होगा। यदि वह मौके पर ही रहता है या मौके से ही पकड़ा जाता है तो उसे अधिकतम पांच वर्ष का कारावास सुनाया जाएगा। यह दोनों ही सजाएं गैर जमानती होंगी। इसमें आरोपी को जेल जाना होगा और न्यायालय से ही उसकी जमानत हो सकेगी।
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