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Bulandshahar News: ग्राम सचित ने मृत बताई, डेढ़ साल में भी वृद्धा कागजों में जिंदा नहीं हो पाई

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वृद्धा पेंशन वाली खबर के लिए। विकास भवन का फोटो।
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बुलंदशहर। वृद्धा पेंशन में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले में काफी संख्या में वृद्धजन ऐसे हैं जो पिछले कई वर्षों से वृद्धा पेंशन का लाभ ले रहे थे लेकिन ग्राम सचिवों ने जिंदा होने के बावजूद उन्हें कागजों में मृत दर्शाकर पेंशन बंद करवा दी है। अब सैकड़ों की संख्या में बुजुर्ग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। वह कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक को अपने जिंदा होने के सबूत दे रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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शासन ने ऐसे बुजुर्गाें के लिए वृद्धा पेंशन योजना लागू की है, जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है और उनके पास आय का कोई श्रोत नहीं है। न ही उनके पास दो वक्त की रोटी की व्यवस्था है। ऐसे सभी पात्र बुजुर्गों को एक हजार रुपये प्रति माह पेंशन देने की व्यवस्था है। जिले में 58 हजार पात्र बुजुर्ग पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इसके लिए ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान से सत्यापन कराया जाता है कि संबंधित बुजुर्ग पात्र है या नहीं। उनके सत्यापन के बाद ब्लॉक स्तर के अधिकारी सत्यापन करते हैं। उसके बाद पात्र मानते हुए उन्हें योजना में शामिल किया जाता है। प्रत्येक वर्ष बुजुर्ग के जीवित या मृत होने की रिपोर्ट ग्राम सचिव को देनी होती है। जिले में कई ग्राम सचिवों ने अपनी सत्यापन रिपोर्ट में जीवित बुजुर्गों को मृत दर्शा दिया है। इससे उनकी पेंशन बंद हो गई है।

साहब, देख लो मैं जिंदा हूं
जहांगीराबाद के गांव जसर निवासी वृद्धा हुक्मो देवी ने बताया कि पिछले कई साल से वह पेंशन ले रही थीं। करीब डेढ़ साल पहले उनकी पेंशन आनी बंद हो गई। पहले उन्होंने बैंक में जानकारी की, उसके बाद ब्लॉक से लेकर विकास भवन स्थिति समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय गईं। वहां अधिकारियों के सामने खड़े होकर कहा कि साहब देख लो मैं जिंदा हूं, मेरे पास प्रमाणपत्र भी हैं। मेरी पेंशन क्यों बंद की गई है, उसको चालू कराया जाए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने आश्वासन देकर उन्हें भेज दिया। दो बार और गई लेकिन पेंशन शुरू नहीं हुई।
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कर्मचारी बोला-तुम तो मर चुके हो
स्याना रोड स्थित कांशीराम आवास में रहने वाले मनोहर जैन ने बताया कि मार्च माह तक पेंशन मिली थी। उसके बाद पेंशन नहीं आ रही है। बैंक के बाद समाज कल्याण कार्यालय गया। वहां कर्मचारियों को पेंशन बंद होने के बारे में जानकारी दी तो उन्होंने आधार कार्ड और कुछ प्रमाणपत्र मांगे। उसके बाद कर्मचारियों ने कहा कि तुम यहां कैसे आ गए, तुम्हें तो कागजों में मृत दर्शाया गया है। मनोहर ने बताया कि कर्मचारियों को जीवित होने का साक्ष्य दिया। मैं ह्रदय रोगी हूं और पेंशन नहीं मिलने से दवा और अन्य खर्च चलाने में दिक्कत आ रही है।


वृद्धा पेंशन ही है सहारा
सदर तहसील के गांव मऊखेड़ा निवासी राजपाल का कहना है कि न जमीन है न ही आय का कोई अन्य साधन। हर तीसरे महीने तीन हजार रुपये मिलने वाली पेंशन से ही गुजारा होता है। करीब आठ माह पहले पेंशन रुक गई। इस कारण से रोटी का संकट आ गया है। शरीर इस लायक नहीं है कि कोई काम करके पैसे कमाए जा सकें। उन्होंने जब कार्यालय में जाकर जानकारी की तो वहां अधिकारियों ने जांच कराई, जिसमें पता चला कि उन्हें मृत दर्शा रखा है। इस कारण पेंशन नहीं आई। जिंदा होने के साक्ष्य कार्यालय को दे दिए हैं। अभी पेंशन नहीं आई है।


दवा लेने में आ रही दिक्कत
ग्राम पंचायत रमपुरा के माजरा मोहनकुटी निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि जनवरी माह में पेंशन बंद हो गई थी। जीवित होने के साक्ष्य ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान से प्रमाणित कराकर प्रमाणपत्र जमा करा दिए। आश्वासन दिया कि मार्च में पेंशन मिल जाएगी लेकिन अभी तक पेंशन शुरू नहीं हुई है। कई चक्कर लगा चुके हैं। बताया कि वह सांस के मरीज हैं। दवा लेने में दिक्कत आ रही है। परिवार का कोई सहयोग नहीं है।



शिकायतें आने के बाद हमने अपने स्तर से सत्यापन कराया है। 1062 बुजुर्ग मृत पाए गए। इनमें से छह बुजुर्ग जीवित मिले हैं। उनके साक्ष्य और विभागीय सत्यापन कराकर पेंशन शुरू कराने के लिए शासन को पत्र भेज दिया है। जल्द ही इनकी पेंशन शुरू करा दी जाएगी। इसके अलावा अन्य का भी सत्यापन कराया जा रहा है, जिससे कोई भी पात्र बुजुर्ग पेंशन से वंचित न रहे। जीवित लोगों को मृत कैसे दर्शाया गया है, उसकी भी जांच की जाएगी। - रचना शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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