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मोहर्रम : गम में डूबे सोगवार, महिलाओं ने किया मातम

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सिकंदराबाद। मोहर्रम का महीना शुरू होने के साथ ही शिया सोगवार गम में डूब गए। महिलाओं, पुरुषों से रंगीन वस्त्र त्यागकर काले वस्त्र धारण कर लिए हैं। शिया इमामबाड़ों में फर्स-ए-आजा बिछ गई है। मजलिसों का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
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पैगंबर साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार, अजीजों की कर्बला के मैदान में शहादत की याद में शिया समुदाय मोहर्रम मनाता है। मजलिसों में मौलानाओं ने इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत का जिक्र शुरू कर दिया। रजा अब्बास रिजवी ने बताया कि शिया समुदाय में मोहर्रम का मातम दो माह दस दिन तक चलता है। इस दौरान कोई की भी खुशी नहीं मनाई जाती। जैसे शादी, ब्याह समेत खुशी के अन्य आयोजन नहीं किए जाते। घरों में पकवान नहीं बनाए जाते हैं। लोग काले कपड़े या सादा कपड़े ही पहनते हैं और सादा भोजन ही करते हैं। महिलाएं शृंगार नहीं करती हैं। मजलिसों में मौलाना कर्बला की जंग और इमाम हुसैन, उनके परिवार के लोगों की शहादत के बारे में तकरीर करते हैं। कर्बला के शहीदों को याद कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की जाती है। शहीदों के नाम पर लंगर किया जाता है। मोहर्रम में निकलने वाले जुलूसों को लेकर अकीदतमंदों ने तैयारी दूसरी कर दी है।
चार तारीख से शुरू होगा जुलूस का सिलसिला

रजा अब्बास रिजवी ने बताया कि नगर में मोहर्रम की चार तारीख से जुलूस का सिलसिला शुरू हो जाएगा। चार तारीख को हुर का जुलूस निकाला जाएगा। पांच तारीख को मेहंदी का जुलूस निकाला जाएगा। छह तारीख को उनके आवास से मातम का जुलूस निकाला जाएगा। इसी दिन बुराक का भी जुलूस निकाला जाएगा। सात तारीख को अलम, मेहंदी का जुलूस निकाला जाएगा। आठ तारीख को भी मेहंदी का जुलूस निकाला जाएगा। नौ तारीख को ताजिए, अखाड़ों का जुलूस निकाला जाएगा। दस मोहर्रम की रात में बड़े अखाड़े का जुलूस निकाला जाएगा।
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