सड़क पर ही बच्चे के जन्म के मामले में हुई प्राथमिक जांच में 108 समाजवादी स्वास्थ्य एंबुलेंस सेवा का फेलियर सामने आ रहा है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि 108 पर कॉल के करीब 22 मिनट बाद बुलंदशहर कॉल डायवर्ट की गई।
इसके करीब 10 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची, लेकिन जब तक बच्चे का सड़क पर ही जन्म हो गया। कुछ ही देर में उसकी मौत भी हो गई। हालांकि परिजन अभी भी करीब एक घंटे पहले 108 पर फोन का दावा कर रहे हैं।
क्षेत्र के गांव हरीरापुर निवासी रीना पत्नी हरिओम ने 108 एंबुलेंस न आने पर सड़क पर नवजात को जन्म दे दिया था। जन्म के समय चिकित्सीय सुविधा नहीं मिलने से नवजात ने दम तोड़ दिया। समाचार पत्रों मेें मामला प्रकाशित होने के बाद शासन ने संज्ञान लिया तो अफसर हरकत में आ गए।
आनन-फानन में सीएमओ ने सुबह दफ्तर खुलते ही पीआरओ डॉ. बीके द्विवेदी को मौके पर भेज जांच के निर्देश दिए। सीएमओ को दी गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि रीना के परिजनों द्वारा करीब 4.30 बजे से 108 पर फोन किया जा रहा था। करीब 5.25 पर कॉल लखनऊ में रिसीव की गई।
इसके करीब 22 मिनट बाद लखनऊ से बुलंदशहर कॉल 5.47 पर डायवर्ट की गई। लखनऊ से कॉल डायवर्ट होते ही एंबुलेंस 5.55 पर गांव पहुंच गई, लेकिन जब तक रीना स्याना अड्डे आ चुकी थी। करीब 6.10 पर एंबुलेंस स्याना अड्डा पहुंची, जहां से उसे महिला अस्पताल लाया गया। 6.20 पर महिला अस्पताल में रीना को भर्ती किया गया।
शुरूआती जांच में सामने आ रहा है कि लखनऊ से बुलंदशहर कॉल डायवर्ट करने में ही 22 मिनट की देरी कर दी गई। इसके कारण ही एंबुलेंस समय से नहीं पहुंच सकी। वहीं जांच को पहुंचे जांच अधिकारी डॉ. बीके द्विवेदी को परिजनों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य अफसरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में समझा-बुझाकर ग्रामीणों को शांत किया गया।
एक घंटा पहले किया था फोनः पति
रीना के पति हरिओम का कहना है कि सड़क पर बच्चा होने से करीब एक घंटा पहले एंबुलेंस को फोन किया गया। फिर दोबारा फोन किया गया। इसके बाद तीसरी बार फोन करने के बाद एंबुलेंस आ सकी। इसी दौरान उसकी पत्नी की प्रसव पीड़ा तेज होती चली गई और मजबूरन उसने सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया। जन्म के समय उपचार नहीं मिलने से उसने दम तोड़ दिया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर बैठी जांच
सड़क पर बच्चे को जन्म देने के मामले में जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी ने घटना पर अफसोस जताते हुए सीएमओ को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह के आदेश पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है, जो तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
डिलीवरी के बाद किया फोन
जांच अधिकारी के एक तर्क ने हैरान कर दिया कि डिलीवरी के बाद ही 108 पर फोन किया गया। जांच अधिकारी ने बताया कि परिजनों द्वारा फोन बेशक 4.30 बजे से किया जा रहा था, लेकिन यह फोन 108 पर मिल नहीं पाया था। फोन बिजी चल रहा था। 5.25 पर जब कॉल रिसीव हुई तो गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया था। जांच अधिकारी का यह तर्क गले नहीं उतर रहा है।
अफसरों की सुनिए
मामला काफी गंभीर है। शुरूआती जांच में पता चला है कि लखनऊ से करीब 22 मिनट की देरी से कॉल डायवर्ट की गई है। डीएम के आदेश पर तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जो कर्मी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
ऐसी घटना अफसोसजनक हैं। सीएमओ को जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। जांच में जो भी कर्मी या अफसर दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो सके।- आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी