जनपद में खाद्य सामग्री में मिलावट का धंधा रुका नहीं है। बुधवार को जारी प्रयोगशाला की रिपोर्ट में केसर लडडू, बेसल लडडू, घेवर और बालूमशाही में केमिकल रंग पाए गए हैं। दो नमूनों में पैकिंग में वायलेशन मिला है। बाकी पांच नमूने अधोमानक पाए गए हैं।
दो माह पूर्व फूड सेफ्टी विभाग की ओर से लखनऊ प्रयोगशाला को जांच के लिए खाद्य सामग्री के सेंपल भेजे गए थे। बुधवार को प्रयोगशाला ने जांच रिपोर्ट जिला स्तरीय फूड अफसरों के पास भेज दी। जांच में सोन पापड़ी अधोमानक पाई गई। घेवर अनसेफ निकला। घेवर में कलर देने के लिए मैट सल्फेट कलर का प्रयोग किया गया था।
केसर लडडू में बटर यलो रंग पाया गया। केसर लडडू भी अनसेफ था। मिल्क केक अधोमानक पाया गया है। बालू शाही अनसेफ थी। बालू शाही में मैट सल्फेट रंग का प्रयोग किया गया था। मिठी पपडी सब स्टैडर्ड निकली है। ईजी डे का हैंड मेड पापड़ में पैकेजिंग की दिक्कत थी। इसलिए इसे मिथ छाप श्रेणी में रखा गया है। पटॉटो चिप्स में मिथ छाप निकला है।
11 में से चार नमूने अनसेफ पाए जाने पर साफ है कि खाद्य सामग्री में जहर का कारोबार जारी है। प्रशासन के अधिकारी भी इसमें बराबर के जिम्मेदार है। फूड सेफ्टी की जिम्मेदारी भजे ही फूड अफसरों पर भले ही हो लेकिन प्रशासनिक अधिकारी इसका नोडल अफसर होता है।
पिछले दिनों छापामार कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सैपलिंग की आड़ में दुकानदारों से खूब मलाई लूटी। इसकी एवज में मिलावटखोरों ने जहर का कारोबार कर एक के चार बनाए।
चार नमूने अनसेफ मिले
डीओ बुलंदशहर रणधीर सिंह का कहना है कि 11 खाद्य नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। चार नमूने अनसेफ पाए गए है। अनसेफ आइटम सेवन के योग्य नहीं होते हैं। बाकी सैंपल मिथछाप और अधोमानक पाए गए हैं।