200 करोड़ के मुआवजा वितरण में अनियमितता और बंदरबांट की जांच शुरू हो गई है। 22 जनवरी को शासन द्वारा गठित तीन अफसरों की टीम बुलंदशहर में मुआवजे से संबंधित फाइल खंगालने आ रही है। जांच को लेकर अफसर और कर्मचारियों की सांस फूली हुई है।
यूपीएसआईडीसी (उप्र स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट कारपोरेशन) ने 1993 में औद्योगिक विकास के लिए अरनियां क्षेत्र के चार गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया था। यूपीएसआईडीसी ने औद्योगिक विकास करने के बजाय भूमि टीएचडीसी के हवाले कर दी। टीएचडीसी उक्त जमीन पर अब थर्मल पावर प्लांट का निर्माण करवा रहा है।
प्रशासन पर आरोप है कि उसने किसानों से भूमि पर कब्जा लेने के बजाय किसानों को दो-दो बार मुआवजा बांट दिया। दूसरी बार में किसानों को 200 करोड़ रुपये बांटे गए। इसको कोर्ट ने गलत माना और अफसरों को कड़ी फटकार लगाते हुए शासन को जांच कराने को आदेश दे दिया। शासन की ओर से अफसरों की कमेटी बना दी गई है।
22 फरवरी को मुआवजा वितरण में धांधली का पता लगाने के लिए शासन की टीम बुलंदशहर पहुंचेगी। टीम 23 फरवरी को भी जांच करेगी। जांच को लेकर अफसर और कर्मचारियों की सांसें फूली हुई हैं। अफसर और बाबू फाइलों को दुरुस्त करने में लगे हुए हैं। बता दें कि कुछ किसान वाजिब मुआवजे की मांग को लेकर कोर्ट चले गए थे। किसानों की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था।