माननीय और साहब के गोद लिए 144 गांव उनकी लापरवाही का दंश झेल रहे हैं। एक साल से ज्यादा समय में इन गांवों से न तो कुपोषण की स्याह छाया छंट पाई और न ही शौचालयों का निर्माण हो पाया है। खास बात यह है कि साहब के गोद लिए सभी गांवों में एक साल के भीतर कुपोषण का सफाया करने का संकल्प लिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
तत्कालीन डीएम ने गत वर्ष कमालपुर और बादौली गांव को गोद लिया था। जिस समय गांव गोद लिए गए थे, उस समय कमालपुर में 16 बच्चे अतिकुपोषित और 68 बच्चे कुपोषित श्रेणी में पाए गए थे। बादौली में अतिकुपोषित बच्चों की तादाद 17 थी जबकि 21 बच्चे कुपोषित चिंहित किए गए थे। मार्च माह की सर्वे रिपोर्ट में डीएम द्वारा गोद लिए कमालपुर में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सात बची है।
कुपोषित 68 बच्चों में 35 अब भी कुपोषण के शिकार हैं। बादौली में अतिकुपोषित आठ और कुपोषित तीन बच्चे अब भी मौजूद हैं। इसी तरह सीडीओ के गोद लिए गांव मूढ़ीबकापुर और सुरजावली का हाल भी बदतर है। मूढ़ीबकापुर में चार बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में थे लेकिन सवा साल में महज दो बच्चे ही ठीक हो पाए हैं।
यहां कुपोषित बच्चे 30 थे लेकिन सात बच्चे अब भी कुपोषण की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सीडीओ के सुरजावली गांव की तस्वीर भी मूढ़ीबकापुर से कम भयावह नहीं है। सुरजावली में सवा साल के भीतर महज एक बच्चे को अतिकुपोषण से छुटकारा मिल पाया है जबकि गांव में 10 बच्चे अतिकुपोषित थे। अब भी नौ बच्चे इस श्रेणी में हैं।
इसी तरह, इस गांव में कुपोषित बच्चों की तादाद 23 थी, जिसमें से 17 बच्चों की सेहत में सुधार हुआ है। छह मासूम अभी भी कुपोषण की जद में हैं। गोद लिए गांवों में शौचालय निर्माण का काम भी अधूरा है। डीएम और सीडीओ के गोद लिए गांव शत प्रतिशत संतृप्त नहीं हैं।
डीएम के बादौली गांव में 150 शौचालय बनने थे लेकिन सभी अधूरे हैं। सीडीओ के गांव मूढ़ीबकापुर में 200 और सुरजावली में 100 शौचालयों का निर्माण होना था लेकिन सुरजावली में 95 शौचालयों का निर्माण अधूरा है।
बता दें कि जिले में साहब के गांवों में 36714 शौचालय बनने थे। सवा साल में महज 11978 शौचालयों का निर्माण हो पाया है। 11978 में से करीब छह हजार शौचालय चालू हालत में नहीं हैं।
कुपोषण के खिलाफ अभियान जारी है। 27 जून को मुझे मूढ़ीबकापुर और सुरजावली गांव पहुंचना है। पोषाहार वितरण की निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि पोषाहार सही हाथों तक पहुंच पाए। - जसजीत कौर, सीडीओ, बुलंदशहर
सांसद के गांव का हाल बुरा
भले ही केंद्र सरकार दो साल के कामों का रिपोर्ट कार्ड पेश कर अपनी पीठ थपथपा रही है लेकिन सांसद भोला सिंह का गोद लिया गांव डिबाई का गांव भोपतपुर आदर्श बनने की बाट जोह रहा है।
दो बरस बाद भी इस गांव की सूरत नहीं बदली है। बता दें कि गांव में 108 शौचालयों का निर्माण होना था। शौचालयों का 50 फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ है। जबकि स्वच्छता अभियान मोदी सरकार की प्राथमिकता में है।