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Bulandshahar News: बिजली के निजीकरण के विरोध में किसान सभा व माकपा का हल्ला बोल

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ककोड़ बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली घर पर धरना देते कार्यकर्ता संवाद
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बुलंदशहर/शिकारपुर/औरंगाबाद। ऊर्जा निगम के निजीकरण के खिलाफ किसान सभा व कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारियों ने जिले भर में प्रदर्शन किया। इस दौरान पदाधिकारियों ने नारेबाजी करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया रोकने की मांग की। साथ ही मूढ़ीबकापुर बिजलीघर पर किसान सभा के पदाधिकारियों ने बिजली का निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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किसान सभा व कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारियों ने अधिशासी अभियंता के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव चंद्रपाल सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश में गरीबों के घर में अंधेरा करके पूंजीपतियों की दिवाली मनवाने के लिए निजीकरण की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ा रही है। इसी के तहत स्मार्ट मीटर लगाने, लाइन लॉस को उपभोक्ताओं पर डालने, पीक आवर्स (बिजली की अधिक खपत की अवधि) में बिजली की बढ़ी दर वसूलने, किसानों के बिल माफी के लिए नलकूपों पर मीटर लगवाने की शर्त थोपने समेत अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं।
चंद्रपाल सिंह ने कहा कि यदि भाजपा सरकार बिजली को निजी कंपनियों को सौंपने में सफल हुई तो किसान खेती नहीं कर पाएगा। आम उपभोक्ताओं को निजी कम्पनियां सरेआम लूटेंगी। गरीब के घरों में फिर से अंधेरा हो जाएगा। किसान सभा के उपाध्यक्ष जगवीर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों किसान एकत्रित होकर गांव बिजलीघर पर पहुंचे। वहां किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मूढीबकापुर बिजलीघर पर धरना दिया।
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किसान सभा के मंडल सचिव जयभगवान शर्मा ने कहा कि सरकार कुंभ में हुए हादसे में मरने वालों की संख्या तक को देश को नहीं बता रही है। धार्मिक उत्सवों का इस्तेमाल केवल वोट बटोरने व समाज में नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है। पदाधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में अर्जुन सिंह, वीरेंद्र लौर, गजेंद्र सिंह, मूलचंद त्यागी, तुंगल सिंह, सुभाष सिंह, ब्रह्मपाल सिंह मौजूद रहे।
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