देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 80 किमी की दूरी पर जनपद में आजादी के छह दशक बाद 2.30 लाख घरों में शौचालय नहीं बने हैं।
इसे प्रशासन की नाकामी कहें या कुछ और कि पंचायत राज विभाग ने 13 वर्षों में मात्र 60 घरों में शौचालयों का निर्माण करा पाई है।
गौर करने वाली बात यह है कि सांसद, डीएम और सीडीओ समेत अफसरों के गोद लिए 144 गांवों में 36 हजार से अधिक परिवार शौचालय से वंचित हैं।
बता दें कि जनपद में रहने वाले परिवारों की कुल संख्या 4.16 लाख है। इनमें से 2.30 लाख परिवार शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा से महरुम हैं।
निजी तौर पर 1.26 लाख घरों में लोगों ने शौचालय बनवाए हैं। बड़ा फंड खर्च करने के बावजूद वर्ष 2002-03 से अब तक पंचायत राज विभाग सिर्फ 60 हजार घरों में शौचालय बनवा पाया है।
सांसद के गोद लिए गांव भोपतपुर में करीब 300 घरों में शौचालय नहीं है। डीएम के गोद लिए गांव पिलखना में 177 और बदौली में 280 परिवार शौचालय से वंचित हैं।
वहीं, सीडीओ के गांव मूढ़ी बकापुर और सुरजावजी में क्रमश: 573 और 131 परिवारों में शौचालय नहीं है। बता दें कि, जिले में अफसरों ने 144 गांवों को गोद लिया हुआ है। इन 144 गांवों में भी 36 हजार 714 परिवार ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं।
शौचालय का खर्च 12 हजार
एक शौचालय का निर्माण खर्च 12 हजार रुपये आता है। नौ हजार रुपये केंद्र सरकार और तीन हजार रुपये राज्य सरकार वहन करती है। इसके बावजूद पंचायत राज विभाग अभी तक 2.30 लाख घरों में शौचालय बनवाने में नाकाम रहा।
जिले में 2.30 लाख घरों में शौचालय नहीं है। इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। शौचालय निर्माण का कार्य जारी है। - राजेश कुमार सिंह, डीपीआरओ, बुलंदशहर