गांव जलीलपुर मे चल रहे दो दिवसीय तब्लीगी इज्तमे का बुधवार को अमन की दुआ के साथ समापन हो गया। दुआ से पूर्व मौलाना मुफ्ती महमूद बस्ती ने कहा कि हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस्लाम के दायरे में जिंदगी गुजारे। खुदा की इबादत करे और दीनी काम करे। दुआ के बाद 70 जमातें रवाना हुईं। इस दौरान बिना दहेज 42 निकाह भी हुए।
मौलाना मकसूद हापुड़, हाफिज शाहिद बनारस और मौलाना मकसूद मेरठ ने फरमाया कि जो लोग गलत रास्ते पर चल पड़े हैं, हम उनको उनके हाल पर नहीं छोड़ सकते। इसलिए हर मुसलमान के लिए जरूरी है कि वह भलाई को आम करे और बुराई को रोके। बयान के बाद मौलाना ने इज्तमा में दुआ कराई। 11:30 बजे दुआ शुरू हुई। इस दौरान जिसे जहां जगह मिली,वह वहीं दुआ मे शामिल होने के लिए बैठ गया।
बावजूद लोग चिलचिलाती धूप मे बैठकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते रहे। दुआ पूरी होने के बाद भी भीड़ का आना जारी रहा। इज्तमें में 42 जोड़ों के निकाह पढ़ाए गए। दुआ के बाद इज्तमा स्थल से 70 जमातें रवाना हुई। इस मौके पर कई लोगो ने अकीदतमंदों को फजाइल-ए-कुरआन तकसीम की।इज्तमा के आयोजन में जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अल्लानूर, मौलाना अब्बास, मौलाना हारून, इकबाल, मेहंदी हसन, अब्दुल वाहिद और आकिल आदि का सहयोग रहा। संस्थाओं की ओर से शिविर लगाकर भोजन-शर्बत की व्यवस्था की गई।