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फर्जीवाड़ा : संविदा कर्मचारियों को मनरेगा में बना दिया श्रमिक

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फर्जीवाड़ा : संविदा कर्मचारियों को मनरेगा में बना दिया श्रमिक
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बुलंदशहर। ऊंचागांव क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर में पांच संविदा कर्मचारियों को मनरेगा का श्रमिक बनाकर फर्जी तरीके से लाभ देने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक ने 21 अपात्र ग्रामीणों को भी श्रमिक बनाकर गलत तरीके से 2.40 लाख रुपये का लाभ दे दिया। मनरेगा के नोडल अधिकारी की जांच में मामले का खुलासा हुआ है। इसके अलावा अन्य कई गांव में भी ग्राम प्रधान और सचिवों ने इस तरह का खेल किया है, जिसकी जांच चल रही है।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग के परियोजना निदेशक और मनरेगा के नोडल अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि गांव रघुनाथपुर में मनरेगा में घोटाले की शिकायत सीडीओ से की गई थी। पूरे प्रकरण में जांच की गई तो विद्युत विभाग के पांच संविदा कर्मचारियों को मनरेगा में श्रमिक पाया गया। पांचों को 44,268 रुपये का भुगतान किया गया। एक संविदाकर्मी गांव भगवानपुर का रहने वाला है। इसके अलावा 21 ग्रामीण ऐसे हैं, जिन्हें फर्जी मनरेगा का श्रमिक बनाया और उनके नाम पर 1.95 लाख रुपये की राशि जारी कर दी गई। दो ऐसे भी लोग मिले, जिन्होंने डबल मनरेगा के जॉब कार्ड बनवा रखे हैं। हालांकि उन्होंने एक ही जॉब कार्ड पर काम किया।
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प्रधान, ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक ने मिलकर किया फर्जीवाड़ा
यह फर्जीवाड़ा गांव रघुनाथपुर की ग्राम प्रधान जायदा बेगम, तत्कालीन ग्राम सचिव सुनील कुमार और तकनीकी सहायक जसपाल राणा ने किया है। पूरे प्रकरण में इन तीनों को दोषी माना गया है। इन पर कार्रवाई के लिए फाइल तैयार की जा रही है। डीएम के निर्देश पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। फर्जीवाड़ा कर मजदूरी के तहत प्राप्त की गई राशि की रिकवरी होगी। इसके लिए सीडीओ अभिषेक पांडेय ने भी आदेश जारी कर दिए हैं।
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मनरेगा में फर्जीवाड़े की जांच पूरी हो गई है। सभी से रिकवरी की तैयारी शुरू हो गई है। कार्रवाई के लिए फाइल तैयार की जा रही है, जिसे जल्द कार्रवाई के लिए डीएम कार्यालय भेजा जाएगा। - विनय कुमार श्रीवास्तव, मनरेगा के नोडल अधिकारी
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