विधानसभा चुनाव के महाकुंभ में शुद्ध पानी भले ही चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया, लेकिन हालात बहुत बुरे हैं। सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र के कई गांवों में हजारों लोगों को दूषित पानी से निजात दिलाने के लिए पांच करोड़ खर्च कर ओवर हैड टैंकों का निर्माण कराया गया था।
दिलचस्प यह है कि आम आदमी की प्यास बुझाने के लिए खड़ी की गई टंकियां खुद पानी के इंतजार में हैं। जबकि यहां दूषित भूजल लोगों को बीमार बना रहा है। 10 साल से विधानसभा, जिला पंचायत, ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनाव आए - गए। मगर सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र के सांवली, शेरपुर, तिलबेगमपुर, जोखाबाद, गोपालपुर आदि गांवों में शुद्ध पानी का इंतजाम नहीं हो सका।
नतीजतन, इन गांवों में रहने वाली आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जोखाबाद के पानी में तो आर्सेनिक निकल रहा है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत के बावजूद इनके हालात नहीं सुधरे हैं। 2007 में सांवली, तिलबेगमपुर, शेरपुर, जोखाबाद गोपालपुर में पांच करोड़ की लागत से पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था।
जल निगम ने गांवों में सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाई ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल सके। इसके बावजूद ग्रामीणों शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसे हुआ पानी दूषित ः सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्रियोें से निकले गंदे पानी को ट्रीट करने के बजाय जहरीले पानी को भूगर्भ में डाला जा रहा है।
जल निगम के मुताबिक इंडस्ट्रियल एरिया में आने वाले सभी गांवों का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है। इंडस्ट्री से जहरीले पानी में आर्सेनिक फ्लोराइड, नाइट्रेट और आयरन की अधिकता भूगर्भ में बढ़ा दी है।