विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है। अब सभी की निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। चुनाव में हार-जीत जिले के कई दिग्गजों का सियासी भविष्य तय करेगा। चुनावी दंगल में कूदे कई दिग्गज यदि हारे तो उनके राजनीतिक भविष्य पर ग्रहण लग सकता है।
विधानसभा चुनाव लड़ रहे दिग्गजों का सियासी भविष्य मतदाताओं ने ईवीएम में बंद कर दिया है। 11 मार्च को जब यह ईवीएम खुलेंगी तो कई सियासी दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगी। बुलंदशहर सीट पर लड़ रहे चारों मुख्य प्रत्याशी सियासी दिग्गज हैं।
राजस्व मंत्री रह चुके भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह सिरोही पर सभी की नजरें हैं। यदि उन्हें जीत मिली तो उनका कद बढ़ जाएगा, हारने में उनके सियासी करियर पर ब्रेक लग सकता है। इसी तरह बसपा से दो बार विधायक रहे हाजी अलीम और डिबाई से दो बार विधायक रहे श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। गुड्डू पंडित पहले बसपा से विधायक बने।
भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद वह रालोद के टिकट पर मैदान में कूदे। हारने पर उनकी सियासी नैया डगमगा सकती है। पूर्व मंत्री के पुत्र शुजात आलम भी सदर सीट से कई चुनाव हार चुके हैं। इसके अलावा डिबाई से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे देवेंद्र भारद्वाज के लिए भी यह करो या मरो का चुनाव है।
देवेंद्र भारद्वाज तीन बार विधानसभा और एक बार लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं। कई सभाओं में देवेंद्र भारद्वाज खुद कह चुके हैं कि यदि वह हारे तो उनका यह अंतिम चुनाव होगा। इसके अलावा अनूपशहर से दो बार बसपा विधायक रहे गजेंद्र सिंह और रालोद उम्मीदवार होशियार सिंह के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है।
हैट्रिक लगाने पर गजेंद्र सिंह का बसपा में कद बढ़ेगा। दो बार विधायक रह चुके होशियार सिंह भाजपा से बगावत के बाद रालोद के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। स्याना विधानसभा से सपा को छोड़ रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे ठाकुर सुनील सिंह के लिए भी यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है। वह तीन बार विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं। चौथी बार हार मिली तो सियासी भविष्य पर ग्रहण लग जाएगा।