इसके बावजूद ससुर बन्ने खां, सास शहाना और पति नवाज शरीफ दहेज से खुश नहीं थे और आए दिन उनकी बेटी को प्रताड़ित करते थे। तीनों दहेज के एक लाख रुपये की मांग को लेकर पीड़िता महजबीं के साथ मारपीट करते थे। दहेज की खातिर 26 सितंबर 2020 को रात को 11 बजे ससुराल पक्ष के लोगों ने उनकी बेटी की पीटकर हत्या कर दी। सूचना मिलने पर पीड़ित परिवार के साथ इस्लामाबाद गांव पहुंचे, जहां पर उनकी बेटी मृत पड़ी थी।
इसके बाद 29 सितंबर 2020 को थाना प्रभारी ने आईपीसी धारा 498 ए, 323, 304 बी और 3-4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज की। इसकी विवेचना तत्कालीन सीओ सुरेश कुमार को दी गई। इसमें वादी इकबाल, राजमीन, जाहिद के बयान अंकित किए गए। इसमें पोस्टमार्टम कर्ता चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार के बयान भी दर्ज किए गए। इसका आरोप पत्र 31 अक्टूबर 2020 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
इसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बुलंदशहर की ओर से दंड वाद 27 नवंबर 2020 को खुर्जा सत्र न्यायालय को सौंपा गया। तब से ही यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। कुछ दिनो पहले इसमें अभियुक्ता शाहना की मौत हो गई, जिससे उसको मामले से बाहर किया गया। इसमें नौ लोगों गवाह और छह साक्ष्य के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को सजा सुनाई।
दहेज हत्या को हटाकर हत्या में दोषी सिद्ध हुए अभियुक्त
शनिवार को सजा सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार सचान ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य से यह साबित होता है कि अभियुक्तों की ओर से दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर महजबीं को प्रताड़ित करते हुए क्रूरता पूर्ण व्यवहार किया गया एवं मारपीट की गई। 26 सितंबर 2020 को महजबीं का मुंह दबाकर व गला घोंट कर हत्या की गई। जो दहेज हत्या में नहीं है बल्कि जानबूझ कर मानव वध किया जाना हत्या परिधि में आता है। ऐसे में अभियुक्त नवाज शरीफ और उसके पिता बन्ने खां पर आईपीसी 498ए, 302 और धारा चार दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दोषी सिद्ध किया गया।