बुलंदशहर। दिल्ली-बदायूं हाईवे पर शुक्रवार दोपहर हुए सड़क हादसे ने हर किसी की रूह कंपा दी। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके के हालात को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ईको वैन की गति बेहद तेज थी। मोड़ पर अज्ञात वाहन को बचाने के प्रयास में जैसे ही चालक का नियंत्रण छूटा, वैन पलक झपकते ही सड़क से उतरकर ब्रेक लगने के बावजूद करीब 20 मीटर तक कच्चे में घिसटती चली गई और पेड़ से जा टकराई।
हादसे का मुख्य कारण वाहन की अत्यधिक रफ्तार और अचानक आया मोड़ माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार छतारी की ओर से बेलौन देवी मंदिर की तरफ तेज गति में जा रही थी। जैसे ही वैन नवीपुर खेड़िया और रतनपुर गांव के बीच स्थित शिव मंदिर के पास पहुंची, वहां मौजूद हल्के मोड़ पर सामने अचानक एक अज्ञात वाहन आ गया। वाहन को बचाने के चक्कर में चालक ने स्टेयरिंग काटा, लेकिन बेकाबू रफ्तार के कारण पहियों की सड़क पर पकड़ छूट गई।
जमीन पर बने टायरों के गहरे घिसटने के निशानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चालक ने अंतिम क्षणों तक गाड़ी को रोकने की कोशिश की। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वैन का अगला बायां हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। कंडक्टर साइड की सीट बेस से टूटकर पीछे बैठे यात्रियों की छाती और पैरों में जा धंसी, जिसके कारण अगली और बीच की सीट पर बैठे लोगों को संभलने या बचने का रत्ती भर अवसर नहीं मिला। टक्कर के झटके से खिड़कियों के कांच टूट गए और वैन के दोनों पिछले दरवाजे चटककर बाहर निकल आए। वैन का इंजन पूरी तरह दबकर केबिन के अंदर जा घुसा था, जिससे अगली सीटों पर बैठे लोग बुरी तरह फंस गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया खौफनाक मंजर
राहगीर मुकेश ने बताया कि हादसे के वक्त वह बुलंदशहर की ओर से नरौरा की तरफ जा रहे थे। कार सामने की ओर से आई और अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। टक्कर होते ही धूल का गुबार उठा और चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। जिसके बाद उन्होंने अपनी बाइक रोकी और वहां पहुंचे तो देखा कि गाड़ी के परखच्चे उड़ चुके थे और लोग अंदर खून से लथपथ फंसे हुए थे। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी सुरेश ने बताया कि वैन की गति कम से कम 80 से 100 किमी प्रति घंटा रही होगी। उन्होंने कहा, मोड़ पर सामने से आए वाहन को बचाने में गाड़ी लहरा गई।
ग्रामीणों ने सब्बल और रॉड से गेट तोड़े
हादसे के बाद ग्रामीण तत्काल मदद के लिए दौड़े। अंदर फंसे घायलों को निकालने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सीटें आपस में पिचक गई थीं। स्थानीय लोगों ने घरों से लोहे की रॉड, सब्बल और कुल्हाड़ी लाकर गाड़ी की बॉडी और सीटों को तोड़कर लोगों को बाहर निकाला।
सड़क पर बिखरी थीं चूड़ियां, खिलौने और प्रसाद, खून से लाल हो गया था मंजर
हादसे के ठीक बाद घटनास्थल का दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहला देने वाला था। घायल महिला अपने पति और मासूम बच्ची को बचाने के लिए बदहवास होकर पुकार रही थी, लेकिन दोनों की सांसें पहले ही थम चुकी थीं। घटनास्थल पर सड़क किनारे कच्चे में मृतकों और घायलों का सामान बिखरा पड़ा था। चौंढेरा मंदिर से लाया गया माता रानी का प्रसाद, नारियल, चुनरी, रोली और फूल सड़क पर खून के साथ सने हुए पड़े थे। एक वर्षीय मासूम बच्ची प्रगति और पांच वर्षीय प्रतीक के खिलौने, पानी की बोतलें और बिस्किट के पैकेट खून के लाल धब्बों के बीच पड़े देख मौके पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। पूरा वातावरण गमगीन था और हर कोई इस मंजर को देखकर स्तब्ध रह गया।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, स्पीड ब्रेकर की मांग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नवीपुर खेड़िया और रतनपुर के बीच शिव मंदिर के पास बना यह मोड़ तकनीकी रूप से काफी खतरनाक है। दूर से आने वाले चालकों को मोड़ का सही अंदाजा नहीं लगता। इसके अलावा हाईवे पर इस जगह न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगा है और न ही रफ्तार थामने के लिए कोई रंबल स्ट्रिप या संकेतक। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस संवेदनशील मोड़ पर तत्काल गति नियंत्रक संकेतक और स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं, जिससे कि भविष्य में इस तरह के जानलेवा हादसों को रोका जा सके।