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30 के सापेक्ष 14 चिकित्सक तैनात, कैसे मिले सही इलाज

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30 के सापेक्ष 14 चिकित्सक तैनात, कैसे मिले सही इलाज
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बुलंदशहर। जिला अस्पताल लंबे समय से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। 30 के सापेक्ष महज 14 चिकित्सक ही तैनात हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में और 200 के करीब मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं। विशेषज्ञ की कमी के चलते मरीजों को हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से ही पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। इसके बाद पैथोलॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और ओपीडी के अलावा दवा वितरण काउंटर पर दोपहर तक लाइन लगी रहती है। सोमवार व शनिवार को 1000-1500 करीब मरीज पहुंचते हैं तो अन्य दिनों में करीब एक हजार मरीज आते हैं। 177 बेड की क्षमता वाले अस्पताल की ओपीडी से लेकर वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए 143 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष जिला अस्पताल में महज 87 पद पर चिकित्सक समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी तैनात हैं। 56 पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। इसमें 10 सिस्टर, पांच स्टाफ नर्स, डेंटल हाइजेनिस्ट, इलेक्ट्रीशियन, लिपिक, पांच वार्ड ब्याय और छह सफाई कर्मचारी भी शामिल है।
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इमरजेंसी सेवाओं के लिए चार इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के पद स्वीकृत हैं। सिर्फ एक पद भरा है, अन्य काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। बाकी पद रिक्त होने से मौजूद विशेषज्ञों को ड्यूटी दे दी जाती है। इससे ऑपरेशन समेत अन्य सर्जरी और ओपीडी सेवा प्रभावित हो रही है। ईएमओ की ड्यूटी दे रहे स्वास्थ्य अफसर भी परेशानियों से जूझ रहे हैं।
इनकी चल रही कमी
जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, ईएमओ के अलावा पैथोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेष, रेडियोलॉजिस्ट, अधीक्षक/प्रभारी भंडार, चीफ फार्मेसिस्ट आदि की कमी चल रही है। इसकी वजह से आईसीयू, डिजिटल एक्सरे, बर्न वार्ड आदि की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाती है।
अस्पताल में पिछले काफी समय से विशेषज्ञों की कमी चल रही है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए कई बार शासन को पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल जो संसाधन उपलब्ध हैं उन्हीं से मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
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- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
बोले लोग
आईसीयू नहीं है
जिला अस्पताल में न तो आईसीयू की सुविधा है और न ही बर्न वार्ड में सुविधा मिलती है। शिकायत करने पर भी अफसर खानापूर्ति करने में लगे रहते हैं। - नरेश कुमार
हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं
अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट एक होने पर दो माह का इंतजार करना पड़ता है। हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण निजी अस्पताल जाना पड़ता है। - पूजा रानी
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