प्रशासनिक अफसरों के दावों से उलट औद्योगिक क्षेत्रों में हालात अच्छे नहीं हैं। हर तिमाही निरीक्षण के दौरान औद्योगिक इकाइयों में इफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) चालू मिलने के दावे के बाद भी सिकंदराबाद और खुर्जा में औद्योगिक इकाइयों से जुड़े इलाकों में भूगर्भ जल पीने लायक नहीं रह गया है।
पानी का दूषित होना अफसरों के निरीक्षण और औद्योगिक इकाइयों के संचालकों के बीच साठगांठ की ओर इशारा कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि जिले की हर एक बड़ी यूनिट में इंडस्ट्रियल वाटर वेस्ट के शुद्धिकरण के लिए ईटीपी लगी हैं। पता चला है कि ईटीपी तो जरूर हैं, लेकिन खर्च का भार बढ़ने से उन्हें चालू नहीं रखा जाता।
अधिकांश उद्योग अपना कचरा और पानी बाहर ही फेंक रहे हैं। यही कारण है कि सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र से सटे शेरपुर, हृदयपुर-शावली, जोखाबाद और तिल बेगमपुर समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों में पानी जहरीला हो चुका है। सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 400 से अधिक व्यवसायिक यूनिट हैं।
खुर्जा में मीट प्रोसेसिंग प्लांट और पाटरी उद्योग हैं। बड़े दुग्ध प्लांट स्याना, बुलंदशहर, खुर्जा और गुलावठी में हैं। जानकारों के मुताबिक ईटीपी द्वारा ट्रीट पानी को सिंचाई कार्यों में भी प्रयोग किया जा सकता है।
हर तीन माह में होती है मानिटरिंग
हर तीन माह में औद्योगिक यूनिटों में लगे ईटीपी की मानिटरिंग की जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की मानें तो हर तीसरे महीने बोर्ड की टीम ईटीपी का निरीक्षण करती है। हाल में ही किए गए निरीक्षण में कई ईटीपी खराब पाए गए थे, उनको नोटिस भेजा जा चुका है।
यदि दोबारा इन्ही यूनिट में ईटीपी बंद पाई गई तो कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। जिले की हर एक यूनिट इटीपी लगी हुई हैं। इटीपी चल रही हैं या नहीं इसकी जांच हर तीन माह में एक बार कराई जाती है। डिफाल्टर उद्यमियों को नोटिस जारी किए जाते हैं। - जीएस श्रीवास्तव, श्रेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
प्रदूषण मुक्त मॉडल जिला होगा बुलंदशहर
प्रदूषण नियंत्रण के मामले में यूपी के 75 जिलों के लिए अपना जिला एक नजीर बनेगा। दरअसल,शासन ने बुलंदशहर को प्रदूषण मुक्त मॉडल जिला बनाने का निर्णय लिया है। डीएम की अध्यक्षता में शासन ने अफसरों की कमेटी भी गठित कर दी है। कमेटी में कृषि और पाल्यूशन बोर्ड के अफसर को शामिल किया गया है।
जनपद का कृषि क्षेत्रफल 3 लाख 64 974 हेक्टर है। भौगोलिक और कृषि के दृष्टिकोण से बुलंदशहर अन्य जिलों से बड़ा है। अन्य जिलों की तुलना में बुलंदशहर में देहात क्षेत्र भी अधिक है। इन तमाम आंकड़ों पर गौर करते हुए शासन ने बुलंदशहर को प्रदूषण मुक्त मॉडल जिला बनाने का निर्णय लिया है।
इसके लिए कृषि अपशिष्ट का शत प्रतिशत निस्तारण होगा। किसानों के साथ अफसर बैठक करेंगे और कृषि अपशिष्ट के मैनेजमेंट की तकनीकी जानकारी देंगे। ताकि पुआल और कचरे से उठा जहरीला धुंआ पर्यावरण में जहर न घोल पाए। प्रदूषण रोकथाम के लिए कारपोरेट सोशल रिस्पोंसबिलिटी (सीएस आर) फंड के साथ सामाजिक संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
इस संबंध में 28 अफसरी को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में कमेटी के सदस्यों के साथ मीटिंग तय की गई है। बैठक में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और कृषि विभाग के अफसर भी शामिल होंगे।
प्रदूषण मुक्त मॉडल जिला बनाने के लिए किसानों को डोर टू डोर जागरूक किया जाएगा।
प्रदूषण मुक्त मॉडल जिला बनाने की ओर हम बढ़ रहे हैं। 28 फरवरी को मीटिंग बुलाई गई है। मीटिंग में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
-आंजनेय कुमार सिंह , डीएम