त्वरित प्राथमिक उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित की गई 108 एंबुलेंस सेवा मनमानी का शिकार हो रही है। एक महिला सड़क हादसे के बाद रोड पर करीब एक घंटा तड़पती रही, लेकिन 108 पर कॉल करने पर यह पूछा जाता रहा कि आना जरूरी है क्या? बाद में महिला को राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया।
गंभीर हालत में महिला को जिला अस्पताल से डॉक्टरों ने हायर मेडिकल सेंटर दिल्ली रेफर कर दिया। जहांगीराबाद के गांव रौंडा निवासी माया देवी अपने खेत से घर की तरफ जा रही थी, सड़क पार करते समय एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में माया देवी बुरी तरह जख्मी हो गईं। कार सवार भाग निकला। राहगीरों ने महिला को सड़क किनारे किया।
गौरव नामक राहगीर ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया। पहले तो 10 मिनट तक उससे पूछताछ होती रही। बाद में लाइन को एंबुलेंस चालक से कनेक्ट किया गया। इस पर एंबुलेंस चालक ने बोला कि किसी और ने तो फोन नहीं कर दिया। क्या मेरा आना जरूरी है।
करीब पांच मिनट तक राहगीर और एंबुलेंस चालक के बीच यही नोकझोंक होती रही। बाद में फोन काट दिया गया। करीब 50 मिनट तक वहां कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। बाद में राहगीरों की मदद से महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां से उसे हायर मेडिकल सेंटर दिल्ली रेफर कर दिया गया।
गौरतलब है कि 108 एंबुलेंस चालकों और ऑपरेटरों की मनमानी कई बार सामने आ चुकी है। कई बार घायलों ने एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर दम तोड़ दिया, लेकिन इनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
मामले की होगी जांच मामला गंभीर है। जांच कराई जाएगी कि आखिर एंबुलेंस चालक सूचना देने के बावजूद क्यों नहीं पहुंचा। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ