शिकारपुर थाना क्षेत्र में चार साल पहले हत्या की साजिश रचने वाले एक आरोपी की हत्या के मामले में तीन सगे भाईयों समेत छह हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने दोषियों पर 31-31 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायाधीश ने 18 फरवरी में आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा पर निर्णय के लिए 20 फरवरी की तारीख नियत की थी।
यह निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश द्वादश गुलाब सिंह के न्यायालय ने दिया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी महेश कुमार शर्मा ने बताया कि जगवीरी देवी पत्नी स्व. इंदरपाल सिंह ने 17 फरवरी 2013 को थाना शिकारपुर में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि गांव जलालपुर के योगेंद्र उर्फ पप्पू पुत्र विजयवीर की हत्या सवा साल पहले हुई थी।
जिसमें उसके पति इंदरपाल सिंह 120बी के आरोप में जेल गए थे। वह जमानत पर इंदरपाल सिंह जेल से छूटकर 16 फरवरी 2013 की शाम आए थे। 17 फरवरी 2013 की सुबह करीब नौ बजे इंदरपाल अपने घर में बैठे हुए थे और वह आंगन में झाड़ू लगा रही थी।
उसी समय गांव के धूम सिंह, मीनू उर्फ प्रमेंद्र, भूपेंद्र पुत्र अजयवीर सिंह, विकास पुत्र योगेंद्र, भगत सिंह उर्फ पुनीत पुत्र भूपेंद्र, सुनील पुत्र अरविंद तथा ओम प्रकाश जखैता तमंचे लेकर घर में घुस आए। इन लोगों ने घर में फायरिंग कर दी। गोली लगने से इंदरपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद धूम सिंह, भूपेंद्र, मीनू उर्फ प्रमेंद्र, विकास, भगत सिंह व सुनील के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी। केस में वादिया सहित 13 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए। न्यायाधीश ने 18 फरवरी में अधिवक्ताओं की बहस सुनकर इंदरपाल सिंह की हत्या में गांव के तीन सगे भाइयों समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया था।
सजा पर सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख नियत की थी। सोमवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच सजा पर बहस हुई। दोषियों के अधिवक्ता ने कम से कम सजा की मांग की। न्यायाधीश ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 31-31 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।