सड़क पर बच्चा होने के बाद विरोध में प्रदर्शन करते परिजन।
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दो घंटे इंतजार के बाद भी 108 एंबुलेंस के न पहुंचने पर हीरापुर गांव की एक महिला ने बच्चे को सड़क पर ही जन्म दे दिया। जन्म के समय मेडिकल सुविधा नहीं मिलने से नवजात की मौत हो गई। इससे गुस्साए लोगों ने जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया।
क्षेत्र के गांव हीरापुर निवासी रीना पत्नी हरिओम को सोमवार को प्रसव पीड़ा होने लगी। उन्होंने शाम चार बजे समाजवादी एंबुलेंस के लिए 108 पर फोन किया। आधा घंटे तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसी दौरान रीना की प्रसव पीड़ा बढ़ने लगी। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची तो परिजन रिक्शे से उसे महिला अस्पताल ले जाने लगे।
रास्ते में उसकी प्रसव पीड़ा तेज हो गई। स्याना अड्डे तक आते-आते रीना की हालत बिगड़ गई और आनन-फानन में उसे स्याना अड्डे स्थित एक तख्त पर लिटा दिया गया। लेटते ही उसने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय कोई मेडिकल सुविधा नहीं मिलने से बच्चे की मौत हो गई। मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
गुस्साए लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। इसके बाद वहां एंबुलेंस पहुंची, जिसमें बैठाकर रीना को महिला अस्पताल ले जाया गया। रीना को महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक उसका उपचार किया जा रहा था। वहीं लोगों की शिकायत पर सीएमओ ने जांच के निर्देश दिए हैं।
मामला काफी गंभीर है। एंबूलेंस के दो घंटे देरी से पहुंचने की जांच कराई जाएगी कि आखिर देरी कैसे हुई। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ