जैसलमेर में तैनात बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के कांस्टेबल गांव सोंझना झाया निवासी मनोज कुमार ने 28 अक्तूबर की रात गोली मारकर आत्महत्या कर ली। रविवार दोपहर बीएसएफ के अधिकारी शव को लेकर गांव पहुंचे तो परिजनों ने आत्महत्या की बात को खारिज करते हुए अधिकारियों से नोकझोंक की।
फोन पर कंपनी सीओ ने जांच व मदद का आश्वासन पर परिजनों ने फौजी का अंतिम संस्कार किया। रविवार दोपहर दो बजे मनोज कुमार (39) का शव लेकर बीएसएफ 161 बटालियन के सब इंस्पेक्टर जीएच मुस्तफा उसके पैतृक गांव पहुंचे।
उन्होंने परिजनों को बताया कि मनोज कुमार ने जैसलमेर की सीमा चौकी 642 जोगिंद्र पर 28 अक्तूबर की रात डेढ़ बजे साथी जवान की रायफल लेकर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। परिवारवालों ने उनसे कहा कि फोटो के अनुसार मृतक के फोटो में रायफल उसके पैरों के बीच पड़ी है। इससे मामला हत्या का लग रहा है।
इसे लेकर परिजनों ने अधिकारियों से बात कराने तक अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया। परिजनों और लोगों को आरोप था कि मनोज की हत्या हुई है। परिजनों ने मनोज को शहीद का दर्जा दिए जाने की भी मांग की। तनाव की सूचना पर खानपुर थानाध्यक्ष जनक सिंह चौहान पुलिस टीम के साथ पहुंच गए। उनके काफी समझाने पर भी ग्रामीण नहीं माने।
परिजनों और ग्रामीणों की बीएसएफ के अधिकारियों से जमकर नोंकझोंक हुई। भीड़ में मौजूद गांव के पूर्व कैप्टन चौ. गोपी सिंह का बीएसएफ के अधिकारियों से संपर्क हो गया। जिन्होंने मृतक जवान के आश्रितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
तब जाकर परिजनों ने मनोज के शव का अंतिम संस्कार करने दिया। पिता जगवीर सिंह, माता लौंगश्री, पत्नी सुधा, 10 वर्षीय पुत्र राहुल का रो-रोकर बुरा हाल था। मनोज की शव यात्रा में शामिल होने सपा नेता ठाकुर सुनील सिंह, पूर्व राज्यमंत्री राकेश त्यागी भाजपा के हेमंत कुमार लोधी भी पहुंचे।
मनोज के दो भाई अमरपाल व संतोष सिंह भी बीएसएफ से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मृतक मनोज की 15 वर्षीय बेटी तनु की मृत्यु तीन माह पूर्व करंट लगने से हो गई थी।