सूबे से विदा होते होते पिछली सरकार ने खुर्जा में चार कमेलों को आनन फानन मेें लाइसेंस दे दिया। दिलचस्प बात यह है कि मीट व्यवसाइयों ने रसूख की ताकत पर जिले के आला अफसरों को भी बाईपास किया। नियमत: डीएम लाइसेंस के लिए कई विभागों की रिपोर्ट के साथ शासन को फाइल भेजते हैं।
लाइसेंस के लिए रसूखदार मीट व्यवसाइयों ने शासन से जिले के उच्च अफसरों को फोन कराकर रिपोर्ट भी मंगवा ली। ऐसे में आला अफसरों के सामने रिपोर्ट भेजने के सिवाय दूसरा चारा नहीं रहा।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. केपी वार्ष्णय ने बताया जिले में कुल 13 स्लाटर हाउस को शासन से लाइसेंस मिला हुआ है। छह स्लाटर हाउस नगर पालिका परिषद डिबाई, शिकारपुर, सिकंदराबाद, गुलावठी, खुर्जा और स्याना के अधीन हैं।
खुर्जा में तीन स्लाटर हाउस फिलहाल रनिंग में हैं। चार स्लाटर हाउस जिनको हाल ही में शासन से लाइसेंस जारी किए हैं, वह कागजों में निर्माणाधीन हैं। सूत्रों के मुताबिक नए कमेलों में भी पशुओं का वध किया जा रहा है।
डीएम ने इन चारों स्लाटर हाउस का स्टेट्स जानने के लिए भी टीमें लगा दी हैं। डीएम ने कहा है कि इंफ्रास्ट्रक्टर खड़ा किए बगैर यदि इन कत्लखानों मेें पशु वध हो रहा है तो सीलिंग की कार्रवाई कर शासन को लाइसेंस रद्द करने के विषय लिखा जाएगा।
मिलता था वीवीआईपी ट्रीटमेंट
सूत्रों के मुताबिक, लाइसेंस के लिए मीट व्यापारी जिले के अफसरों से सीधा संपर्क नहीं करते थे, बल्कि लखनऊ से फोन कराने के बाद अफसरों से मुलाकात की जाती थी। अफसर भी हवा का रुख भांपते हुए मीट कारोबारियों को वीआईपी से कम ट्रीटमेंट नहीं देते थे। मगर अब निजाम बदल चुका है। इसके साथ ही मशीनरी ने भी नजर तिरछी कर ली है।
लाइसेंस शासन स्तर से जारी होता है। जिले के अफसरों की लाइसेंस जारी करने में कोई भूमिका नहीं होती है। लाइसेंस नया हो या पुराना अवैध कटान नहीं होने दिया जाएगा। - आंजनेय कुमार सिंह डीएम