17 मार्च की रात करीब 10 बजे से लापता हुए किसान का पांचवें दिन मंगलवार की दोपहर चने के खेत में शव मिलने से परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों ने गांव के ही युवक पर उधारी के 50 हजार रुपये न चुकाने पर किसान की हत्या करने का मुकदमा थाना कुरारा में दर्ज कराया है। बुधवार की सुबह
आला अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद ही पुलिस शव को कब्जे में ले सकी। खबर लिखे जाने तक आरोपी पुलिस पकड़ से दूर है। कुरारा थानाक्षेत्र के छोटा सिमरा गांव निवासी कालीदीन निषाद के तीन पुत्र रामस्वरूप, रामलखन (38) व रमाकांत हैं। रामलखन सूरत में प्राइवेट फैक्ट्री में काम करता था।
छोटा भाई रमाकांत व बड़ा रामस्वरूप चाट की ठिलिया लगाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। रमाकांत ने बताया कि तीनों भाइयों का परिवार एक साथ रहता है। रामलखन इन दिनों घर आया था। उन्होंने बताया कि 17 मार्च को उसका रामलखन खेत गया था। रात 10 बजे जब वह घर नहीं लौटा तो
उसकी तलाश की लेकिन उसका कहीं सुराग नहीं लगा। ऐसे में 18 मार्च को कुरारा थाने में गुमशुदगी की तहरीर दी। 21 मार्च की दोपहर करीब 3:30 बजे उसका शव सिमरा गांव के निकट चने के खेत में मिला। रमाकांत ने बताया कि उसके दाहिने हाथ का पंजा कटा था व उसके ऊपर के कुछ हिस्से का मांस
भी गायब था। रमाकांत ने घटना के बताया कि उसके भाई ने सिमरा गांव निवासी निरपत निषाद को कुछ माह पहले 50 हजार रुपये उधार दिए थे। भाई ने कई बार रुपये मांगे। लेकिन निरपत टालमटोल कर रहा था। आरोप है कि रुपयों के लिए ही निरपत ने उसके भाई की हत्या की है। थानाध्यक्ष अभिमन्यू
यादव ने बताया कि दर्ज गुमशुदगी में आरोपी निरपत निषाद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया कि गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। मृतक की मां व अन्य परिजनों को रो रोकर बुरा हाल था। मृतक अपने पीछे तीन पुत्रियां व दो पुत्र छोड़ गया है।
मवेशियों को हांकने पर देखा शव
गांव निवासी युवती पूनम मंगलवार की दोपहर खाली पड़े खेतों के पास अपने जानवर चरा रहा थी। तभी एक खेत में खड़ी फसल में जानवर के चले जाने पर वह जानवरों को हांकने चली गई। जहां उसने शव पड़ा देखा। शव की शिनाख्त होनेे पर उसने मृतक के परिजनों को सूचना दी। जिस पर परिजन गांव के तमाम लोग आ गए। मृतक के भाई रमाकांत ने बताया कि उसके बाद उसने फोन कर कुरारा थाने को सूचना दी।
शव को कब्जे में लेने के लिए पुलिस रही हलाकान
घटना के मामले में तह तक जाने के लिए परिजनों व ग्रामीणों ने मौके से पुलिस को शव उठाने नहीं दिया। परिजनों की मांग थी कि डॉग स्क्वायड मंगाया जाए। मंगलवार की शाम मौके पर पहुंचे सीओ योगेश कुमार ने लोगों को समझाया और कानपुर से स्क्वायड की टीम आने की बात कही। देर रात पहुंची टीम को सफलता न मिलने पर ग्रामीण व परिजन इस बात पर अड़ गए कि काले वाले कुत्ते मंगाए जाएं तभी वह यहां से शव को उठाने देंगे। बुधवार की सुबह एडीएम राजेश कुमार प्रजापति, एएसपी बीके मिश्रा व अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे तब कहीं जाकर सुबह करीब 11 बजे शव को पुलिस अपने कब्जे में ले सकी।