नरौरा थाना क्षेत्र के पिलखना गांव में दो साल पहले भट्ठा बंटवारे के विवाद में अपने सगे माता-पिता, भाई, भाभी, भतीजा और भांजी की हत्या करने वाले दंपत्ति समेत चार दोषियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस ने सभी दोषियों को जिला कारागार में भेज दिया है। बता दें कि कोर्ट ने दो जनवरी 2016 को चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नवनीत कुमार शर्मा व सुनील चौधरी ने बताया कि वादी अली शेर खां पुत्र मौसम खां ने 23 जनवरी 2014 को थाना नरौरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह चार भाई थे।
उसके पिता मौसम खां ने अपने छोटे बेटे मौबीन खां को भट्ठे में हिस्सा नहीं दिया था। भट्ठे को मौसम खां व शौकीन चला रहे थे। अलीशेर ने पुलिस को बताया कि ताऊ के लड़के जैकम पुत्र जाफर खां, साजिद पुत्र जैकम उनके कारोबार को देखकर खुश नहीं थे।
जमीन पर ईंट पाथने को लेकर कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा था। जिसके चलते वह रंजिश मानने लगे। छोटा भाई मौमीन आरोपियों से मिल गया।
23 जनवरी 2014 की रात करीब 8.30 बजे मौबीन उसकी पत्नी नाजरा, जैकम और साजिद ने छुरी से पिता मौसम खां, मां असगरी, भाई शौकीन खां, भाभी सन्नो, भतीजा सनद और भांजी मुस्कान पर हमला कर हत्या कर दी। बहनोई ने छिपकर अपनी जान बचाई थी।
पुलिस ने नरौरा रेलवे स्टेशन से चारों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। अपर सत्र व जिला न्यायाधीश सप्तम व विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट सुनील कुमार ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस को सुना।
अभियोजन ने वादी सहित तमाम गवाहों और साक्ष्यों का अवलोकन किया। दो जनवरी 2016 को न्यायाधीश ने चारों आरोपी मौबीन पुत्र मौसम खां, नाजरा पत्नी मौबीन, साजिद पुत्र जैकम और जैकम पुत्र जफर खां को दोषी माना। जिसके बाद सोमवार को न्यायाधीश ने सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
दोष सिद्ध होते ही सन्न रह गए थे आरोपी
जब कोर्ट में न्यायाधीश ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था तो चारों आरोपी सन्न रह गए थे। फांसी सजा सुनते ही खुद को बेगुनाह समझने वाले दोषियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। वहीं फांसी की सजा सुनने पर आरोपियों के परिजन न्यायालय परिसर में विलाप करने लगे।
सजा सुनाते समय कोर्ट ने क्या दिया आदेश
कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि मृत्यु होने तक गले में फंदा डालकर लटकाया जाए। जब तक की ये लोग प्राण नहीं त्याग दें।
10 गवाहों ने कोर्ट में दी गवाही
अधिवक्ता नवनीत कुमार शर्मा ने बताया कि पूरी घटना में कुल 10 गवाहों ने कोर्ट में न्यायाधीश के समक्ष गवाही दी। जिसमें पीड़ित पक्ष की ओर से वादी अली शेर और उसके बहनोई जान मोहम्मद ने आंखों देखा हाल न्यायाधीश के समक्ष रखा। जबकि प्रतिवादी पक्ष से आठ गवाह पेश किए गए।
गवाही के दौरान मिली थी हत्या की धमकी
अधिवक्ता नवनीत कुमार शर्मा ने बताया कि सभी दोषियों की हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज हो गई थी। जिसके बाद गवाहों को विभिन्न-विभिन्न तरीकों से हत्या की धमकी मिली। जिसके बाद जिला प्रशासन ने दोनों चश्मदीद गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराई थी।
पीड़ित पक्ष ने कोर्ट और प्रशासन का किया धन्यवाद
वादी अलीशेर ने कहा कि कोर्ट का फैसला उनकी उम्मीदों पर खरा उतरा है। वह शुरू से ही सभी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे थे। अलीशेर और जान मोहम्मद ने जिला प्रशासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसा दिन किसी को भी नसीब न हो।