खनन संबंधी 42 मामलों में बिना स्थलीय सत्यापन के अफसरों ने क्लीरेंस दे दी। फाइलें डीएम तक पहुंची तो मामला खुला। डीएम ने आपत्ति लगाते हुए अब एसडीएम की स्थलीय रिपोर्ट मांगी है। स्थलीय रिपोर्ट के बाद ही पर्यावरण क्लीयरेंस का प्रमाण पत्र जारी होगा। एनजीटी ने माइन की खुदाई के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस लेना अनिवार्य किया हुआ है।
पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए जिले में डीएम की अध्यक्षता में दो कमेटियां गठित हैं। इस कमेटी में पर्यावरण से जुड़े अफसर और एक्सपर्ट सदस्य शामिल हैं। एक कमेटी में पांच और दूसरी में 11 सदस्य हैं। दोनों कमेटियों की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद ही क्लीयरेंस जारी करने का नियम है। क्लीयरेंस पर अंतिम निर्णय डीएम को ही लेना है।
चार दिन पूर्व डीएम के पास एडीएम वित्त बृजेश कुमार ने 42 फाइलें पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए भेजी थी। डीएम ने फाइलों का अध्ययन किया। प्रत्येक फाइल में एसडीएम की स्थलीय की रिपोर्ट नहीं थी।
मतलब जिस जमीन से माइन खोदी जाएगी उस जमीन पर मालिकाना हक किसका है।
इसी को जानने के लिए एसडीएम की स्थलीय रिपोर्ट मांगी गई है। खुर्जा, बुलंदशहर, सिकंदराबाद समेत जिले भर में मिट्टी खनन को लेकर पर्यावरण पर क्लीरेंस प्रशासन से मांगी गई थी। इस संबंध में एडीएम वित्त बृजेश कुमार ने बताया कि डीएम के आदेश के क्रम में सभी उपजिलाधिकारियों को पत्र जारी कर दिया है।
स्थलीय रिपोर्ट आने के बाद पर्यावरण क्लीयरेंस का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि पर्यावरण क्लीयरेंस संबंधी फाइलों में स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट नहीं थी। इसलिए पर्यावरण क्लीयरेंस पर आपत्ति लगाई गई।