हालत बिगड़ने पर बुखार पीड़ित छात्र को लेकर पहुंचे परिजनों को 24 घंटे ओपीडी वाला सीएचसी बंद मिला। चिकित्सक आवास का दरवाजा पीटने पर भी कोई नहीं आया। इस दौरान छात्र की आधे घंटे तक तड़पने के बाद मौत हो गई। काफी देर बाद एक डॉक्टर पहुंचा तो परिजनों ने उसे घेर कर हंगामा किया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाया और परिजनों की सीएमओ से बात कराई। सीएमओ के आश्वासन पर वे शांत हुए और छात्र का शव लेकर लौट गए। गांव बादशाहपुर तालाब निवासी नसीम सैफी का 14 वर्षीय पुत्र समीर कक्षा छह का छात्र था। परिजनों के मुताबिक समीर पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित था।
बृहस्पतिवार रात नौ बजे समीर की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे सीएचसी लखावटी पर ले गए। वहां ताला लगा हुआ था। परिजन चिकित्सक आवास पर पहुंचे और दरवाजा पीटने लगे, लेकिन कोई सुध लेने के लिए नहीं आया। समीर ने आधे घंटे तक तड़पने के बाद सीएचसी परिसर में ही दम तोड़ दिया।
बाद में एक चिकित्सक पहुंचा तो उसे परिजनों ने उसे घेर लिया। चिकित्सक ने डयूटी न होने क ी बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। घटना से गुस्साए परिजनों ने हंगामा कर दिया। सूचना पर पुलिस पहुंची और गुस्साए परिजनों को शांत कराया और सीएमओ से बात कराई। बाद में सीएमओ ने परिजनों को समझाकर शांत किया।
एंबुलेंस से छात्र को सीएचसी लाया गया था, जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के वक्त चिकित्सक अस्पताल में ही मौजूद था - दीपक ओहरी, सीएमओ