सीब्रीआई के छापे दौरान बीएसएनएल आफिस में एक ठेकेदार की बड़ी रकम छिपे होने की चर्चा फैली। जिस समय सीबीआई जांच कर रही थी, उस समय ठेकेदार की गाड़ी भी एक्सचेंज में खड़ी थी।
छापे के दौरान बीएसएनएल आफिस में हड़कंप मच गया। लोगों में चर्चा फैली कि मामला नोटबंदी से जुड़ा हुआ है। बीएसएनएल के अफसरों और ठेकेदारों ने काली कमाई की रकम यहां छिपाई है।
हालांकि कुछ देर बाद सीबीआई के एक अधिकारी ने बाहर आकर स्पष्ट किया कि मामला काले धन से जुड़ा नहीं है। एक व्यक्ति से बीएसएनएल अफसरों ने रिश्वत मांगी थी। उसकी शिकायत के बाद डीजीएम आरएस वर्मा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई की टीम तीन कारों से बीएसएनएल आफिस पहुंचे थे। इनमें एक गाड़ी पंजाब, दूसरी यूपी और तीसरी दिल्ली के नंबर की थी। अफसर कार नंबर यूपी14सीटी-3337, डीएल1जेडए-7245 और पीबी65एएच-4762 में सवार होकर आए थे। सीबीआई अफसरों की संख्या 10 से 12 थी। इनके चालक भी शीशे बंद कर कारों में ही बैठे रहे।
सभी अफसर शाम 5.15 बजे आए थे। जिस समय सीबीआई की टीम अपनी कार्रवाई कर रही थी तो उस समय एक्सचेंज के गेट पर मात्र गार्ड और एजीएम का ड्राइवर ही मौजूद रहे। जिस कमरे में टीम के अफसर थे। वहां पर बीएसएनएल के कितने अधिकारी या कर्मचारी थे, इसका कोई पता नहीं चला। देर रात तक सीबीआई के अफसर आफिस जांच में जुटे थे।