अदालत से हत्या के आरोप में आजीवन कारावास का सजायाफ्ता द्वारा साक्ष्य छुपाकर स्याना तहसील के गांव कुचेसर फोर्ट के एक कॉलेज में प्रधान लिपिक की नौकरी करने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा एक शिकायतकर्ता ने डीआईओएस कार्यालय में शिकायत देकर किया है। शिकायतकर्ता ने विभागीय अफसरों पर सूचना के अधिकार के तहत सूचना नहीं देने का भी आरोप लगाया है।
गांव नगला कटक निवासी विक्रम सिंह ने शिकायत देकर आरोप लगाया है कि 1987 में जो इस समय कॉलेज में प्रधान लिपिक है। उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। 1989 में अदालत ने प्रधान लिपिक को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
बाद में यह मामला हाईकोर्ट चला गया था, जिसकी सुनवाई भी जल्द होने वाली है। विक्रम का कहना है कि सजायाफ्ता आरोपी तब तक नौकरी नहीं कर सकता जब तक उसे कोर्ट से क्लीन चिट न मिल जाए। मगर विभागीय अफसरों ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की और वह लगातार नौकरी कर रहा है। इतना ही नहीं उसकी सर्विस बुक में भी इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया है।
विक्रम का कहना है कि इस बारे में उसने पहले सूचना के अधिकार के तहत सभी कागजात एकत्रित किए और डीआईओएस कार्यालय में भी शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसे विभाग से मांगी गई सूचना भी नहीं मिली और अब उसने राज्य सूचना आयोग को अपील की है।
हाईकोर्ट में जल्द ही सुनवाई है और मुझे निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई है। मेरी अर्धसरकारी नौकरी है और मैं नौकरी करने का तब तक अधिकार रखता हूं, जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता। - प्रधान लिपिक
मेरी विद्यालय में नियुक्ति वर्ष 2010 में आयोग से हुई है। प्रधान लिपिक को आजीवन कारावास होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। मुझे बदनाम करने की साजिश है। - प्रधानाचार्य
इस तरह की शिकायत अभी मेरे पास नहीं है। कार्यालय खुलने पर जांच करवाई जाएगी। शिकायत को दबाया नहीं जाएगा। -वीना यादव, डीआईओएस