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Bulandshahar News: चोला औद्योगिक क्षेत्र परियोजना हवा में, जमीन पर लहरा रही फसल

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चोला औद्योगिक क्षेत्र परियोजना की जमीन पर लहराती फसल। संवाद
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बुलंदशहर। जनपद में औद्योगिक विकास और रोजगार को गति देने के लिए चोला क्षेत्र में शुरू की गई औद्योगिक विकास योजना 27 साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। आलम यह कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की गई भूमि में अब भी फसल लहरा रही है। किसान भूमि अधिग्रहण के नए नियमों के अनुसार मुआवजा दिए जाने की मांग करते चले आए रहे हैं। जबकि यूपीसीडा पुराने नियम के अनुसार किसानों को मुआवजा देना चाहती है। जिसके चलते यह योजना अब तक फंसी हुई है।
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जनपद में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए चोला औद्योगिक क्षेत्र के लिए गांव हमीदपुर, जुनैदपुर, सराय जगन्नाथ, शाहबाजपुर, तालबपुर, सरायदुल्हा, आशादेई उर्फ प्रानगढ़, आशबपुर, बौढा, लुहाकर आदि गांव की 2585 एकड़ भूमि अधिग्रहित किए जाने के लिए वर्ष 1998-1999 में नोटिफिकेशन किया था। किसानों के खतौनी से नाम भी हटा दिए गए है। नोटिफिकेशन के 27 साल बाद भी यूपीसीडा अधिग्रहित भूमि पर भौतिक कब्जा नहीं ले सका है। किसानों और यूपीसीडा के बीच मुआवजे को लेकर सहमति नहीं बनने पर योजना अधर में लटकी हुई है। किसान भूमि अधिग्रहण के नए कानून के अनुसार मुआवजा दिए जाने, अन्यथा खतौनी में किसानों के नाम दर्ज किए जाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करते चले आ रहे हैं।

नए नियम के अनुसार मिले मुआवजा, जमीन देने से नहीं इंकार

चोला किसान सेवा समिति के अध्यक्ष अजित दौला ने कहा कि किसानों को जमीन देने से इंकार नहीं है। यदि किसानों को भूमि अधिग्रहण के नए कानून या बाजार भाव पर मुआवजा दिया जाए तो किसान जमीन देने के लिए तैयार हैं। जिसके लिए क्षेत्र के किसानों ने शासन, प्रशासन, यूपीसीडा को अपनी सहमति भी दे दी है। कहा कि खतौनी से किसानों के नाम हटाए जाने से किसानों को जमीन का मालिकाना हक भी नहीं रहा है, जिससे किसान बच्चों की शादी, शिक्षा, अन्य कार्यों के लिए बैंक से लोन भी नहीं ले सकते हैं। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग है कि यदि उन्हें नए नियम, बाजार भाव के अनुसार जमीन का मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो खतौनी में फिर से किसानों के नाम दर्ज किए जाए।
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युवाओं को रोजगार और आर्थिक जीवन स्तर में होगा सुधार

चोला औद्योगिक क्षेत्र के शुरू होने से जनपद में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उद्योग लगने से होटल व्यवसाय, लाॅजिस्टिक, परिवहन आदि व्यवसाय भी विकसित होंगे, जिससे क्षेत्र के लोग अपने व्यवसाय शुरू कर सकेंगे और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। औद्योगिक इकाइयों में भी क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।




जमीन का अधिग्रहण पुराने कानून के तहत किया गया था। शासन के निर्देश पर भूमि अधिग्रहण के नए कानून के अनुसार शासन को मुआवजे का विवरण भेज दिया है, जो करीब चार हजार करोड़ है। अब इस संबंध में शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा। - संजीव कुमार, नगर मजिस्ट्रेट



मामला याचिका समिति में विचाराधीन है। इस संबंध में क्षेत्र के किसानों को मुख्यमंत्री से मिलवाया जाएगा। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। - लक्ष्मीराज सिंह, क्षेत्रीय विधायक
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