ठेकेदार और आईपीएच अधिकारियों के अलावा इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों पर भी केस चलाया जा सकता है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के तहत करोड़ों से किया जा रहे निर्माण कार्य में मॉनीटरिंग करने वाले अफसर ही फंस गए हैं।
डीएम की जांच में मेटरनिटी विंग में घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग पाया गया, जबकि इसकी मॉनीटरिंग का जिम्मा संभाल रहे अफसर अब तक काम को सही बताते चल रहे थे।
तत्कालीन डीएम शुभ्रा सक्सेना ने कुछ दिनों पहले ही 18.91 करोड़ की लागत से बन रही मेटरनिटी विंग का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गंभीर खामियां पाई गईं। विंग का निर्माण घटिया सामग्री से होता हुआ मिला था।
जिलाधिकारी ने तत्काल निर्माणदायी संस्था को घटिया निर्माण तोड़कर दोबारा निर्माण करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसी दौरान जिलाधिकारी का तबादला हो गया। तबादला होने के बाद घटिया निर्माण सामग्री से किया गया कार्य ध्वस्त नहीं किया गया।
जिलाधिकारी ने मेटरनिटी विंग निर्माण में घटिया सामग्री की प्रयोग के बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में मॉनीटरिंग कर रहे अफसरों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
डीएम की जांच में जो आपत्ति उठी थीं, उन्हें निर्माणदायी संस्था से दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। घटिया निर्माण कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हैंडओवर करने से पहले सभी आपत्तियां दूर कराई जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ