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44 लाख के बिल फर्जीवाड़े में कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

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44 लाख के बिल फर्जीवाड़े में कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
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अनूपशहर। बिजली उपभोक्ताओं के साथ 44 लाख रुपये के फर्जीवाड़े में कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एसडीओ ने आरोप लगाया है कि उसकी गैरमौजूदगी में कंप्यूटर ऑपरेटर ने फर्जी तरीके से उपभोक्ताओं के बिल कम कर दिए थे। जिसके चलते विभाग को लाखों रुपये का चूना लगा है।
उपखंड क्षेत्र में 24500 घरेलू, 955 वाणिज्यिक और 3200 ट्यूबवेल उपभोक्ता हैं। घरेलू कनेक्शन वाले 400 बिजली उपभोक्ताओं को उस समय झटका लगा, जब दिसंबर माह के बिलों में सामान्य से दस गुना तक अधिक का एरियर बिल में जुड़कर आया। जब इस संबंध में उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों से शिकायत की तो अधिकारियों ने भी वर्षों पुराना बकाया होने का दावा करते हुए उपभोक्ताओं को टरका दिया। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के करीब 400 उपभोक्ताओं के बिलों में 44 लाख रुपये की धनराशि जोड़ी गई है। अब मामले में बिजली निगम के एसडीओ सुभाष चंद ने कंप्यूटर ऑपरेटर नितिन कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप लगाया है कि मेरी गैरमौजूदगी में आरोपी ने फर्जी तरीके से सैकड़ों उपभोक्ताओं का बिल कम कर दिया। आरोप है कि मेरी गैरमौजूदगी में चार्ज देखने वाले प्रभारी अधिकारी की आईडी का भी दुरुपयोग किया गया। जब मामले की जानकारी हुई तो आरोपी से पूछताछ की, इसके बाद आरोपी ने कार्यालय आना बंद कर दिया। पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच शुरू की है। एसडीओ ने बताया कि जिन बिलों में से धनराशि कम की गई थी, उस धनराशि को मय जुर्माना वसूलने की तैयारी की जा रही है।
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जनवरी 2018 से नवंबर 2021 तक लाखों का चूना
एसडीओ ने दावा किया है कि उनकी आईडी से जनवरी 2018 से नवंबर 2021 तक बिलों में फर्जीवाड़ा किया गया। पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले अधिकारी अब खुद भी अपने बुने जाल में उलझते जा रहे हैं। इस मामले में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, कि आखिर उन्होंने अपनी गोपनीय आईडी और पासवर्ड कंप्यूटर ऑपरेटर को क्यों दिया। प्रभारी अधिकारी की आईडी से फर्जीवाड़े की बात भी अधिकारियों के हजम नहीं हो रही है।
तीन वर्षों से चलता रहा फर्जीवाड़ा, अधिकारी रहे मौन
बिजली के बिलों से रकम को कम करने का फर्जीवाड़ा करीब तीन वर्षों तक अधिकारियों की आईडी से होता रहा, लेकिन अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। चर्चा है कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही पूरा फर्जीवाड़ा किया गया और बाद में जब खुद को फंसता पाया गया तो आरोपियों ने कंप्यूटर ऑपरेटर को बलि का बकरा बना दिया। दूसरी ओर एसडीएम व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कोई विभागीय जांच शुरू नहीं की गई है।
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चीफ इंजीनियर बिजली निगम अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले में अभी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आगे की जांच पुलिस करेगी, जल्द ही मामले में जांच टीम गठित की जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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