सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को खुलता है आयुर्वेदिक अस्पताल
ऊंचागांव/खानपुर। क्षेत्र में स्थित एक आयुर्वेदिक अस्पताल साल में सिर्फ दो दिन के लिए खुलता है। लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अस्पताल का जल्द संचालन नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। खानपुर स्थित यूनानी अस्पताल में भी चिकित्सक के नहीं आने पर ताला लटका हुआ है।
ऊंचागांव ब्लॉक क्षेत्र के गांव प्याना कला भवन जर्जर होने पर आयुर्वेदिक अस्पताल को अस्थाई तौर पर भदौरा गांव के पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल को केवल 26 जनवरी और 15 अगस्त के दिन झंडा फहराने के लिए खोला जाता है। उसके बाद पूरे साल ताला लटका रहता है। ग्रामीण शीशपाल और प्रेम सिंह ने बताया कि अस्पताल में न तो कोई कर्मी आता है और न ही कोई चिकित्सक आता है। इसके चलते सालभर आयुर्वेदिक अस्पताल पर ताला लटका रहता है। अस्पताल न खुलने पर मजबूरन झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बंद पड़े अस्पताल को खुलवाने के लिए उच्च अफसरों से भी मांग की जा चुकी है। जल्द अस्पताल नहीं खोला गया तो आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान सत्यप्रकाश, नरेश, सतवीर, रंजीत, आनंद आदि मौजूद रहे।
खानपुर के यूनानी अस्पताल में चिकित्सक नहीं
खानपुर नगर के यूनानी अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती भी है, लेकिन वह लंबे समय अनुपस्थित हैं। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि उच्च अफसरों से साठगांठ के चलते चिकित्सक और कर्मी अनुपस्थित रहते हैं। इससे उपचार के लिए भटकना पड़ता है। मरीज बिन्नामी चौहान, हरविंदर सिंह और मूलचंद सिंह आदि का आरोप है कि पिछले काफी समय से अस्पताल आ रहे हैं। लेकिन चिकित्सक के न मिलने पर बिना उपचार के लौटना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों ने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी व जिलाधिकारी को शिकायत देकर लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कोट
स्टाफ कम होने की वजह से सप्ताह में तीन-तीन दिन ड्यूटी लगाई गई है। कुछ समय पूर्व निरीक्षण किया गया। दोनों स्थानों पर चिकित्सक मिले हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। लापरवाही मिलने पर संबंधित पर कार्रवाई करेंगे। - डॉ. महेश कौशिक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी