आजादी के समय का कत्ल-ए-आम और आज का कालाआम चौराहे का सौंदर्यीकरण कर इसे जनता को समर्पित कर दिया गया। जेपी संस्थान ने कालाआम चौराहे का सौंदर्यीकरण कराया है। रविवार को जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह, एसएसपी अनीस अहमद अंसारी और जेपी ग्रुप के सीईओ मनोज गौड़ ने कालाआम पार्क को सौदर्यीकरण के बाद जनता को समर्पित किया।
जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि यह जगह हमारे क्रांतिकारियों की शहादत की गवाह है। जेपी ग्रुप की पहल से इसे सौंदर्यीकरण कर जनता को समर्पित किया गया, जो स्वागत योग्य है। डीएम ने कहा कि जनपद के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों की आजादी दिलाने में अहम भूमिका रही है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है।
बता दें कि नगर के सबसे बड़े लैंडमार्क के लिए मशहूर कालाआम चौराहा आजादी की लड़ाई का गवाह रहा है। डीएवी के प्राचार्य डॉ. विकास शर्मा, प्रोफेसर ओपी सिंह आदि बताते हैं आजादी से पहले इस चौराहे को कत्ल-ए-आम के रूप में जाना जाता था।
इस चौराहे पर एक पेड़ था, जिस पर अंग्रेज आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाते थे। आजादी के बाद लोग इसे लोग कालाआम चौराहा बोलने लगे। कालाआम चौराहे से शहर के पांच मुख्य मार्ग जुड़ते हैं। जेपी ने शहर को दिया तोहफामशहूर उद्योगपति जेपी गौड़ ने कालाआम चौराहे का सौंदर्यीकरण कर इसे जनता को समर्पित कर शहर को बड़ा तोहफा दिया है।
इस चौराहे पर जेपी संस्थान द्वारा अनुमानित करीब 50 लाख रुपये खर्च किया गया है, लेकिन जेपी ने इस बजट को सार्वजनिक नहीं किया है। जेपी गौड़ ने इस पार्क के सौंदर्यीकरण पर खर्च बजट को सार्वजनिक करने से इंकार किया है। उनका कहना है कि यह शहर को समर्पित उनका गुप्त दान है।