श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुन भावविभोर हुए भक्त
बुलंदशहर। श्री बांके बिहारी मित्र मंडल के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन स्वामी सुमेधानंद ने कृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा की कथा का वर्णन किया। कहा कि जहां सत्य एवं भक्ति का समन्वय होता है। वहां भगवान का आगमन अवश्य होता है।
जब भगवान श्रीकृष्ण नंद गांव पहुंचे तो देखा कि गांव में इंद्र पूजन की तैयारी में 56 भोग बनाए जा रहे हैं। श्रीकृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि कैसा उत्सव होने जा रहा है। जिसकी इतनी भव्य तैयारी हो रही है। नंद बाबा ने कहा कि यह उत्सव इंद्र भगवान के पूजन के लिए हो रहा है, क्योंकि वर्षा के राजा इंद्र है और उन्हीं की कृपा से बारिश हो सकती है। इसलिए उन्हें खुश करने के लिए इस पूजन का आयोजन हो रहा है। इस पर श्रीकृष्ण ने इंद्र के लिए हो रहे यज्ञ को बंद करा दिया और कहा कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल मिलता है। ऐसा होने के बाद इंद्र गुस्सा हो गए और भारी बारिश करना शुरू कर दिए। नंद गांव में इससे त्राहि-त्राहि मचने लगी तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया। नंद गांव के लोग सुरक्षित हो गए। इसके बाद से ही गोवर्धन पूजा का क्रम शुरू हुआ। गोवर्धन भगवान की पूजा सभी भक्तों को पंडित द्वारा विधि विधान से कराई गई। उन्होंने गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार गोवर्धन पर्वत को उठाकर भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र देव के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा की थी। इसके अलावा आचार्य ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा को समझना सिर्फ मानुष जन्म में ही संभव है। श्री नर्वदेश्वर धाम पर आयोजित हो रही भागवत कथा में बुधवार को अश्विनी अग्रवाल और अंजू अग्रवाल यजमान रहे। कथा में मंडल के सदस्य संजय गोयल, काष्र्णि विजय कृष्ण महाराज, अतुल कृष्ण, विकास अग्रवाल, अरुण गोयल, गौरव सिंघल, दीपेन गांगुली, सुलभ बंसल और नीरज आदि मौजूद रहे।