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बाला हत्याकांड : पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह समेत चार को आजीवन कारावास की सजा

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बाला हत्याकांड में सजा पाने वाली महिला अभियुक्त।
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बुलंदशहर। बाल हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को गाजियाबाद की साजिशकर्ता पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह समेत चार को दोषी करार दिया है। सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ में नीतू सिंह पर 20 हजार और अन्य तीनों पर 26-26 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। हिस्ट्रीशीटर रहे अपने पति चंद्रवीर सिंह बाटा की हत्या का बदला लेने के लिए नीतू ने यह साजिश रची थी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विजय कुमार शर्मा ने बताया कि अगौता थाना क्षेत्र के गांव पवसरा में पांच फरवरी 2012 को बाला की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप हापुड़ के धौलाना क्षेत्र के गांव सिरोधन निवासी कृष्णपाल और नरेश, बाबूगढ़ के दयानतपुर गांव निवासी योगेश कुमार पर लगाया गया था। गाजियाबाद की पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह पर हत्या की साजिश रचने का आरोप था। अगौता थाने की पुलिस ने जांच के बाद चारों नामजद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश की थी। अपर सत्र न्यायाधीश, न्याय कक्ष संख्या प्रथम डा. मनु कालिया के न्यायालय ने दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद चारों को दोषी करार दिया है। सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। नीतू सिंह पर 20 हजार और अन्य तीनों अभियुक्तों पर 26-26 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

बाला के पति की करनी थी हत्या
घटना के बाद बाल के पति पप्पू उर्फ शेखर उर्फ हरिओम पुलिस को बताया कि गाजियाबाद के हिस्ट्रीशीटर रहे चंद्रवीर सिंह बाटा के साथ उसकी दोस्ती थी। एक दिन चंद्रवीर का शव नाले में पड़ा हुआ मिला था। चंद्रवीर की पत्नी पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीतू सिंह अपने पति की हत्या के लिए पप्पू सिंह को दोषी मानती थी। इसी वजह से नीतू ने उसकी हत्या की साजिश रची थी। पांच फरवरी 2012 की रात लगभग साढ़े दस बजे कृष्णपाल, नरेश और योगेश उसका दरवाजा खटखटाया। पत्नी बाला ने दरवाजा खोला तो वह अभद्रता करने लगे। इस पर बाला ने कह दिया कि पप्पू घर पर नहीं है। पप्पू ने बताया कि गाली-गलौज सुनकर उसने अंदर से ललकारा तो आरोपियों ने बाला को गोली मार दी।
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बेटी की गवाही ने मां के कातिलों को दिलाई सजा
अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल दस गवाहों को पेश किया था। मुख्य गवाही बाला की बेटी काजल की रही। काजल घटना के समय अपने मां के पास ही मौजूद थी। घटना के बाद से वह अवसाद में आ गई थी। इस वजह से 11 साल बाद 2023 में उसकी गवाही कराई जा सकी। काजल ने बताया कि उसी के सामने मां को गोली मारी थी।
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