सपा ने अपने प्रत्याशियों की लिस्ट शुक्रवार को जारी कर दी। इससे कांग्रेस से गठबंधन पर संशय के बादल छा गए। जिससे दोनोें दलों के प्रत्याशियों में बेचैनी बढ़ गई है। सपा ने अपनी सूची में दो प्रत्याशी बदल दिए हैं। कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिसके कारण नेताओं में खलबली मच गई है। हालांकि राजनीतिक पंडित इसे दबाव की राजनीति बता रहे हैं।
कई दिनों से कांग्रेस, सपा और रालोद के बीच गठबंधन को लेकर वार्ता चल रही थी। रालोद को अब गठबधन से अलग ही माना जा रहा है। कांग्रेस और सपा हाईकमान के बयानों से लग रहा था कि गठबंधन तय है, कभी भी इसकी घोषणा हो सकती है।
शुक्रवार को अचानक सपा ने 191 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इसके जारी होते ही गठबंधन पर संशय छा गया। नामांकन के महज चार दिन शेष हैं। अभी तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। सपा की सूची जारी होते ही नेताओं में बेचैनी साफ देखी जा रही है।
उसमें दो प्रत्याशी ही बदल दिए गए हैं। कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जिसके कारण कांग्रेसियों में खलबली है। माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे को लेकर रार चल रही है। संभावना है कि सपा ने दबाव की रणनीति के तहत प्रत्याशियों की लिस्ट घोषित कर दी है।
सपा ने फाइनल लिस्ट जारी कर दी है। जिसमें जिले के सातों विधानसभाओं के प्रत्याशियों के नाम हैं। कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कुछ नहीं कह सकते हैं। जाहिर है कि गठबंधन नहीं हुआ है। - दिनेश गुर्जर, जिलाध्यक्ष, सपा
गठबंधन को लेकर सपा के साथ अभी बातचीत बंद नहीं हुई है। यह निर्णय लखनऊ बैठे पार्टी पदाधिकारियों को लेना हैं। कांग्रेस भी जिले की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी जल्द घोषित करेगी। - सुभाष गांधी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस