खुर्जा के ढाकर गांव निवासी सुरेंद्र ने बताया कि वह और उनका छोटा भाई आकाश (25) मकानों में टाइल्स लगाने का काम करते थे। मंझला भाई कार चालक है जो अक्सर घर से बाहर रहता था। गांव के युवाओं का समूह हरिद्वार में कांवड़ लेने जा रहा था, तो सुरेंद्र और आकाश भी उसमें शामिल हो गए।
सात अगस्त को सभी लोग खुर्जा से बाइक पर बैठकर रवाना हो गए। नीलकंठ मंदिर आदि तीर्थ के दर्शन के बाद नौ अगस्त को कांवड़ उठाने की तैयारी की गई, जिससे पहले सुरेंद्र, गांव निवासी सीटू, बबलू व रवि गंगा नदी में स्नान करने लगे। सुरेंद्र और 12 वर्षीय बच्चा अंकित सामान की देख-रेख कर रहे थे।
चारों के आने के बाद आकाश व अंकित स्नान करने गए। कुछ देर बाद अंकित आया और बताया कि आकाश भैया डूब गए हैं। यह सुनकर सुरेंद्र तुरंत नदी में पहुंचे और आकाश की तलाश शुरू कर दी। करीब 200 मीटर दूर नदी में डूबे आकाश को सुरेंद्र ने बाहर निकाला और होश में लाने का प्रयास किया, लेकिन वह होश में नहीं आया।
नजदीकी अस्पताल लेकर गए तो चिकित्सकों ने आकाश को मृत घोषित कर दिया। सोमवार को आकाश के शव को गांव लेकर आ गए, जिसको देख पत्नी बिजली, सात वर्षीय बिकांश, चार वर्षीय बेटी जानवी फूट फूटकर रोने लगे।