चकबंदी के खेल में जमीन गंवाने वाले किसान का आत्मदाह का कारण प्रशासन ने खारिज कर दिया है। इसका कारण चकबंदी का खेल नहीं बल्कि पारिवारिक कलह को बताया गया है। एडीएम प्रशासन द्वारा मामले की जांच डीएम को सौंपी गई थी। डीएम ने यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेज दी है।
खुर्जा क्षेत्र के गांव मुर्तजाबाद भटवारा निवासी रामकुमार (55) ने 18 जून की शाम को चकबंदी के खेल में फंसने के बाद आत्मदाह कर लिया था। किसान के परिजनों का आरोप था कि उनके पास छह बीघा जमीन थी। चकबंदी की हेराफेरी में छह में से चार बीघा जमीन चली गई। परिजनों के अनुसार, अपनी ही जमीन को वापस लेने के लिए अफसरों ने डेढ़ लाख रुपये की डिमांड की।
किसान ने कर्ज लेकर एक लाख रुपये दे दिए, लेकिन इसके बाद भी उसे जमीन नहीं मिल सकी। साहूकारों ने किसान का जीना दुश्वार कर दिया। सिस्टम से हारकर उसने आत्मदाह कर लिया। किसानों के परिजनों ने शव को कलक्ट्रेट गेट पर रखकर हंगामा किया था। डीएम ने तब मामले की जांच एडीएम प्रशासन को सौंपी।
एडीएम प्रशासन ने मामले की जांच की तो आत्मदाह का कारण ही खारिज कर दिया। एडीएम प्रशासन की रिपोर्ट में आत्मदाह का कारण चकबंदी का खेल नहीं बल्कि गृह क्लेश दर्शाया गया है।
कहा गया कि किसान की पत्नी के साथ कलह हुई, जिसके बाद उसने आत्मदाह कर लिया।
एडीएम प्रशासन की जांच रिपोर्ट को डीएम ने मुख्यमंत्री को भेज दिया है। मृत किसान की पत्नी बल्लो देवी और बेटियां मौत का कारण चकबंदी का खेल बता-बताकर सिर पीट रही हों, लेकिन प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।