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गन्ना सर्वे के लिए घोषणा पत्र के साथ देना होगा आधार नंबर

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गन्ना सर्वे के लिए घोषणा पत्र के साथ देना होगा आधार
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- मतदाता पहचान-पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या बैंक पासबुक भी होगी मान्य
- आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने सर्वे की तैयारियों में जुटा विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। गन्ना पेराई के लिए आगामी सत्र से शुरू होने वाले सर्वेक्षण में इस बार किसानों को घोषणा पत्र के साथ आधार नंबर देना जरूरी होगा। अगर आधार नहीं दिया तो किसान को गन्ना आपूर्ति की सुविधा नहीं मिलेंगी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस व्यवस्था से सर्वेक्षण में फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
शासनादेश के मुताबिक इस बार गन्ना सर्वेक्षण का कार्य 30 जून तक पूरा किया जाना है। सर्वे के समय किसानों को अपने गन्ना क्षेत्रफल के संबंध में घोषणा पत्र व पहचान के लिए आधार नंबर देना होगा। घोषणा पत्र नहीं भरने पर गन्ना आपूर्ति की सुविधा भी नहीं मिलेगी। हालांकि आधार कार्ड न होने पर मतदाता पहचान-पत्र/ ड्राइविंग लाइसेंस या बैंक पासबुक भी मान्य होगी। हर चीनी मिल क्षेत्र में स्टाफ की उपलब्धता के अनुसार 500 से 1000 हेक्टेयर तक की अस्थायी सर्किलें बनाई जाएंगी और गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक कर्मचारी राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक या समिति का कर्मचारी होगा और साथ में एक कर्मचारी चीनी मिल का भी होगा। आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने की सर्वे की तैयारियों में विभाग जुट गया है।
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प्रचार- प्रसार की सौंपी जिम्मेदारी
जिला गन्ना अधिकारी एपी सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश के अनुसार गन्ना विकास परिषद के प्राधिकारी द्वारा ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि टीमवार, तिथिवार, ग्रामवार गन्ना सर्वेक्षण कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। एसएमएस के माध्यम से गन्ना किसानों को गन्ना सर्वेक्षण कार्यक्रम की सूचना समय से दी जाय। इसके साथ ही सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि गन्ना सर्वेक्षण प्रभारी का नाम एवं मोबाइल नंबर को मिल की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जाए।

शत-प्रतिशत लागू होगा जीपीएस सर्वे
इस बार गन्ना सर्वेक्षण कार्य में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस का प्रयोग किया जाएगा। पेराई सत्र 2017-18 में जो चीनी मिलें किन्हीं कारणों से जीपीएस सर्वे नहीं करा सकी थीं, उनके द्वारा भी इस बार संपर्ण गन्ना क्षेत्रफल का सर्वेक्षण कार्य मैनुअल पद्धति से न करके जीपीएस द्वारा ही किया जाएगा।
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विगत वर्ष थी 54 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल
जिले में विगत वर्ष 54 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की फसल थी। इस बार गन्ना उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो आगामी गन्ना पेराई सत्र में इस बार की तरह ही किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि जिले की चीनी मिलों की पेराई क्षमता कम है और गन्ना उत्पादन अधिक है। गन्ना उत्पादक किसानों ने शासन से अभी से चीनी मिलों की गन्ना पेराई की क्षमता बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है।
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