बदायूं के हुकुम सिंह ने बनाई डिवाइस
बाइक में दूसरी चाबी लगते ही मोबाइल में आएगी कॉल
ह्यूमन सेंसर, फायर सेंसर, आधुनिक सौर प्लेट सिस्टम बनाने के प्रयास
बाइक कहीं खड़ी करने के बाद अगर चोरी का खतरा सताता है, तो बेफिक्र हो जाइए, क्योंकि ‘एंटी थेफ्ट कॉलर’ डिवाइस से बाइक चोरी पर रोक लगाई जा सकेगी। यह डिवाइस कादरचौक क्षेत्र के गांव असरासी गांव के किसान रूम सिंह के बेटे हुकुम सिंह ने बनाई है। इसे गांवों की कई बाइकों में लगाकर प्रयोग किया जा चुका है।
यह डिवाइस मोटरसाइकिल में फिट होने के बाद, यदि कोई की-लॉक में चाबी डालेगा तो मोबाइल पर कॉल आएगी। साथ ही मैसेज के जरिए एक कोड प्राप्त होगा। मोबाइल में कोड डालने के बाद ही बाइक स्टार्ट होगी। अन्यथा बाइक लॉक हो जाएगी। इसे तुरंत जानकारी होने के साथ ही बाइक स्टार्ट भी नहीं होगी और चोर पकड़ने में आसानी रहेगी। इस डिवाइस को बनाने में हुकुम सिंह वर्ष 2013 से लगातार इसमें लगा हुआ था, तब जून के अंतिम सप्ताह में सफलता मिली।
बीकॉम तक शिक्षा ग्रहण करने वाले 25 वर्षीय हुकुम सिंह बचपन यानि की वर्ष 2003 से ही आविष्कार करने में लग गए थे। पढ़ाई के साथ नए-नए आविष्कार करना उनका शगल बन चुका है। वह इन दिनों संघ लोकसेवा आयोग की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासनिक सेवाओं में जाकर वह देश सेवा और आविष्कार एक साथ करना चाहते हैं, क्योंकि उनके आविष्कार के लिए उनके पिता खेती करके मिलने वाला अधिकांश धन उनके आविष्कारों में खर्च कर चुके हैं।
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बाइक चोरी के डर से बनाई डिवाइस
हुकुम सिंह के मुताबिक वह कंप्यूटर सेंटर पर कंप्यूटर कोर्स करने गया था। वहां पर नई बाइक से जाता था, हर पल डर लगता था कि कहीं कोई चोर बाइक न चुरा ले जाए। इस वजह से वह बार-बार उठकर आता था। इसी सोच और डर के चलते उसने बाइक में लगाने के लिए यह डिवाइस बना डाली।
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अब बना रहा ह्यूमन और फायर सेंसर
बाइक की डिवाइस बनाने के बाद अब हुकुम सिंह ह्यूमन सेंसर और फायर सेंसर बना रहे हैं। सिंह के मुताबिक घर में ताला लगाने के बाद आप कहीं बाहर जाते हैं और आपकी गैरमौजूदगी में यदि कोई ह्यूमन (मनुष्य) मकान के अंदर प्रवेश करेगा, तो तुरंत मोबाइल पर कॉल आएगी। वहीं घर में आग लगने पर या धुआं उठने पर फायर सेंसर तुरंत कॉल करेगा। इससे आग लगने के दौरान ही काबू पाया जा सकेगा।
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नवाचार में हो चुके हैं पुरस्कृत
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित नवाचार योजना के तहत मई में उन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है, लेकिन अभी तक शासन स्तर से उन्हें अविष्कार करने के लिए कोई खास प्रोत्साहन या लाभ नहीं मिला है।