तमाम जायरीन ने दरगाह पर मांगी मनौतियां, चढ़ाई चादर
ख्वाजा सैयद हसन हजरत सुल्तानुल आरफीन (बड़े सरकार) के 805वें उर्स का आगाज बुधवार को चादरपोशी और महफिल-ए-शमां (कव्वाली) के साथ हो गया। नमाज बाद इशा के तमाम जायरीन ने चादरपोशी करके कामयाबी की दुआएं मांगीं। हजारों की संख्या में पहुंचकर जायरीन ने दरगाह पर फूल चढ़ाए और फातिहा दिलाया। दिन से लेकर देर रात तक जायरीन के आने का सिलसिला जारी रहा।
जिले सहित आसपास जिलों से आने वाले अकीदतमंदों ने दरगाह पर मिन्नतें मांगी और ताबीज एवं दिए खरीदे। चादरपोशी और फातिहा दिलाने के लिए बड़े सरकार के खादिमों (सेवकों) अशफाक हुसैन, अहीदउद्दीन, उमर हुसैन, सरताज हुसैन, माजिद हुसैन आदि ने अकीदतमंदों की मदद की। साथ ही बताया कि बड़े सरकार यमन के बादशाह थे और बदायूं आकर बस गए थे। यहीं पर उन्होंने अल्लाह की इबादत की। बाद में 632 हिजरी में पर्दा (इंतकाल) कर गए थे, तभी से यहां पर उर्स मनाया जाता है। अकीदतमंद चादरपोशी करने के साथ ही फूल चढ़ाते हैं और फातिहा पढ़ाते हैं। दरगाह पर आने वाले तमाम अकीदतमंदों की मन्नत पूरी होने के साथ ही उनकी परेशानियां दूर हो जाती हैं। तमाम अकीदतमंद बड़े सरकार के ताबीज और दिए ले जाते हैं, जिन्हें 40 दिनों तक तेल या घी से जलाने से उन पर बड़े सरकार की रहमत पहुंच जाती है।
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कोतवाली और स्वास्थ्य शिविर लगा
बदायूं। बड़े सरकार उर्स में सुरक्षा और स्वास्थ्य को मद्देनजर रखते हुए पुलिस प्रशासन ने एक अस्थाई कोतवाली और स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है, जिससे कि आपात स्थितियों में दोनों पर नियंत्रण किया जा सके।
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फर्श पर ही लगा लिया बिस्तर
बदायूं। बड़े सरकार की दरगाह पर तमाम अकीदतमंदों ने पहले से ही डेरा जमा लिया है। जगह न मिलने पर दरगाह परिसर के फर्श पर बिस्तर लगा दिया और आराम फरमाया। बुधवार को दिन भर अकीदतमंदों की खासी भीड़ दरगाह पहुंची।