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जलस्तर घटने से बिगड़  गया घाटों का भूगोल

Mon, 05 Sep 2016 11:27 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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जलस्तर घटने से बिगड़  गया घाटों का भूगोल - फोटो : अमर उजाला
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भादों महीना में उम्मीद से कम है गंगा का जलस्तर
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श्रद्घालुओं के लिए भी लेना पड़ा रहा है पड़ोसी घाट का सहारा
गंगा की धार तीन भागों में बंटी, मुख्यधारा पहुंची परली पार
 भादों महीना में ही गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही गिरावट ने मुख्यधारा ने रास्ता बदल लिया है। रास्ता बदलते ही मुख्यधारा कासगंज वाले छोर की ओर पहुंच गई है। हालांकि इस ओर अभी पुराने रेलपुल के आसपास जलस्तर है लेकिन अगले महीना तक गंगा मइया एक ही धार में तब्दील हो जाएगीं। जलस्तर में गिरावट की वजह से घाटों का भूगोल भी गड़बड़ा गया है।
पिछले महीना तक गंगा का सर्वाधिक जलस्तर बदायूं वाले छोर से जुड़े घाटों की ओर रहा था। आस्थावान लोगों के लिए भी इस ओर वाले घाट इसलिए भी ज्यादा सुरक्षित रहे कि नये रेल पुल के पूरब और पश्चिमी ओर वाले घाटों पर गहराई कम थी। आठ-नौ दिन में जलस्तर में जिस तेजी से गिरावट आई, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में जलस्तर में बढोत्तरी नहीं होगी। जलस्तर में गिरावट के साथ ही गंगा ने दूसरी छोर की ओर रूख किया तो दुकानदारों को भी सामान समेटना पड़ गया। घाट से जुड़े दुकानदारों में ओमप्रकाश की मानें तो एक सप्ताह में उन्हें अब तक दो बार अस्थायी दुकानों की जगह बदलनी पड़ी है। तीन भागों में बंटी धाराओं में दो छोटी धाराओं के बीच में रेते के टीले नजर आने लगे हैं। मुख्यघाट पर जलस्तर इतना भी नहीं है कि बैठकर भी डुबकी लगाई जा सके। 
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सरौता-ननाखेड़ा के लोगों को राहत
उझानी। गंगा की मुख्यधारा दूसरी ओर मुड़ जाने से इस ओर की तलहटी से जुड़े गांवों में सरौता, ननाखेड़ा, डिलौर और रमनगला आदि के ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। ग्रामीणों की मानें तो पिछले दिनों तक उन्हें सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ा था। खेतों में सैकड़ों बीघा रकवे में फसलें भी बर्वाद हो गई थीं। पिछले सालों में भी इस इलाके के ग्रामीण फसलों की बर्वादी की वजह से आर्थिक नुकसान उठाते रहे हैं।
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कासगंज वाले छोर के आश्रमों में लौटी रौनक
उझानी। बाढ़ के दिनों में कासगंज वाले छोर के घाटों के आसपास गहराई अधिक होने की वजह से स्नानार्थियों को रूख इस ओर हो गया था। खासकर सावन महीना में तो रस ही बरसने लगा लेकिन अब दूसरी तरफ के घाटों से जुड़े आश्रमों में रौनक लौट आई है। सर्वाधिक आश्रम भी कासगंज वाले छोर पर हैं। घाटों का भूगोल बदलते ही श्रद्घालुओं ने भी उस ओर रुख कर दिया है।
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