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दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव की कमी नहीं, पर संरक्षण के इंतजाम नाकाफी

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जंगल में ब्लैक बक (फाइल)। - फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले के वन क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों की कमी नहीं है, पर उनके संरक्षण के खास प्रबंध नहीं हैं। हर वर्ष तीन मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। गौर करने वाली बात यह है कि यहां इस दिन कोई खास कार्यक्रम भी आयोजित नहीं किया जाता।
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जिले में दातागंज, सदर, सहसवान और बिसौली बड़ी वन रेंज हैं। इन वन रेंज से होकर नदियां भी निकलती हैं। सबसे ज्यादा वन क्षेत्र इन्हीं वन रेंज में है। सहसवान में मालपुर ततेरा, सदर में ककोड़ा, नूरपुर झील समेत कई वन रेंज हैं। बिसौली में अरिल वन वन क्षेत्र है। लेकिन यहां सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण और कब्जे हैं। वन विभाग इनको कब्जा मुक्त कराने को ठोस कदम नहीं उठाता। वन विभाग की ओर से भी हर वर्ष पौधरोपण के नाम पर लाखों पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी जिले में वन क्षेत्र नहीं बढ़ रहा।
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ब्लैक बक संरक्षण की परियोजना केंद्र स्तर पर लटकी
जिले में गंगा और रामगंगा की कटरी में ब्लैक बक (दुर्लभ प्रजाति का काला हिरण) काफी संख्या में पाए जाते थे। दुर्लभ प्रजाति के इन वन्य जीव की संख्या जब कम होने लगी तो स्थानीय स्तर से इसके संरक्षण के लिए कार्ययोजना बना कर शासन को भेजी गई। तत्कालीन डीएफओ विवेक कुमार के समय मार्च 2021 में प्रदेश सरकार ने ब्लैक बक को संरक्षित करने के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) को स्वीकृति दे दी। इसके बाद यह डीपीआर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के लिए भेजा गया। केंद्र की ओर से अब तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। ब्लैक बक संरक्षण के लिए कार्य योजना बनाने से पहले वन विभाग ने 2020 में पहली बार जिले में ब्लैक बक की अधिकारिक गणना कराई। इस दौरान जिले के चार वन रेंज की 42 बीटों की 470 साइट पर 350 से ज्यादार ब्लैक बक मिले थे। इससे पहले स्थानीय स्तर पर 2016 में तत्कालीन डीएफओ समीर कुमार ने भी ब्लैक बक की गणना कराई थी। उस समय जिले में ब्लैक बक की संख्या 900 से ज्यादा थी।
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राज्य पक्षी सारस का बदायूं में बढ़ रहा कुनबा
राज्य पक्षी सारस का बदायूं में कुनबा बढ़ रहा है। दिसंबर 2021 में वन विभाग ने जिले में सारस की गणना कराई तो सदर, दातागंज, बिसौली और सहसवान वन रेंज में 121 सारस मिले हैं। इनमें 11 बच्चे और 110 वयस्क थे। सारस भी दुर्लभ प्रजाति का पक्षी है। यह पक्षी जोड़े में रहता है। वन विभाग हर वर्ष सारस की गणना कराता है। सारस के लिए बदायूं में सदर, दातागंज, बिसौली और सहसवान वन रेंज का मौसम अनुकूल है। गौर करने वाली बात यह है कि दिसंबर 2020 में जिले में सारस की संख्या 80 के आस-पास थी। दिसंबर 2021 में हुई गणना में यह बढ़कर 121 पर पहुंच गई है। वन विभाग की गणना पर गौर करें तो सदर में 18, दातागंज में 43 बड़े सारस और नौ बच्चे, बिसौली में 13 सारस और दो बच्चे तो सहसवान वन रेंज में 36 सारस हैं।
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गंगा में कछला से अटैना तक नौ ठिकानों पर डॉल्फिन
बदायूं में गंगा करीब 135 किमी की दूरी तय करती हैं। कछला से अटैना घाट तक गंगा में कई गहरे स्थान हैं। इस इलाके में नौ ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां दुर्लभ प्रजाति की डॉल्फिन रहती है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीम ने गंगा में डॉल्फिन की तलाश में नवंबर 2021 में सर्वे किया तो नौ स्थानों पर डॉल्फिन का कुनबा होने की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं कई स्थानों पर दुर्लभ प्रजाति के कछुए भी पाए गए थे। इसके बाद वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने गंगा के तटवर्ती गांवों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अभियान भी चलाया। डॉल्फिन के संरक्षण को भी अब भी इंतजाम दुरुस्त नहीं हो सके हैं।
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नदियों के पुनर्जीवन के भी उपाय नहीं
जिले में कई छोटी नादियों का अस्तित्व खत्म सा हो गया है। दबंगों ने अधिकतर जगहों पर नदी की जमीन पर कब्जा कर लिया, इस वजह से उसकी अविरल बहने वाली धारा बीच में अपना दम तोड़ गई। शहर से होकर गुजरने वाली सोत नदी, दातागंज में अरिल, सहसवान में महावा नदी में अब पानी बारिश के दिनों में ही दिखता है। नदियां सूखने और तालाबों पर कब्जे होने के कारण यहां जलीय जीवन खत्म हो गया है। सोत नदी के पुनर्जीवन के कई बार प्रयास भी हुए, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सके। सोत अब नाले में तब्दील हो गई है।
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वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए जाते हैं, लोगों को जागरूक किया जाता है। वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए पौधरोपण भी किया जाता है। वन विभाग जो पौधे रोपता है उनका वृक्ष बनने तक ध्यान रखता है। ब्लैक बक और डॉल्फिन मामले में उच्च स्तर से दिशा निर्देशों का इंतजार है। स्थानीय स्तर पर इनका संरक्षण किया जा रहा है। वन भूमि पर कब्जों को चिह्नित किया जा रहा है। सख्ती के साथ कब्जों को हटवाया जाएगा।
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- अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
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