बदायूं। बदायूं-दातागंज स्टेट हाईवे के चौड़ीकरण के लिए पांच हजार से ज्यादा हरे पेड़ों को काटा जाना है। इसकी जगह 10 गुना नए पौधे लगाए जाने के लिए प्रशासन को जमीन नहीं मिल पा रही है। इस वजह से पेड़ नहीं काटे गए और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
बदायूं-दातागंज स्टेट हाईवे अभी टू-लेन का है। यह हाईवे लोग बरेली से लेकर लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, कन्नौज, फर्रुखाबाद को जाते हैं। पिछले साल पीडब्ल्यूडी ने पीसीयू (पैसेंजर कार यूनिट) सर्वे कराया। उससे पता चला कि हर दिन करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन इससे होकर गुजरते हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई तो एक लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव मंजूर हो गया। 82 करोड़ रुपये में चौड़ीकरण का डीपीआर बनाकर पीडब्ल्यूडी ने शासन को भेजा। इस रोड किनारे करीब 1800 पेड़ हैं। उनको काटने के बाद ही चौड़ीकरण हो सकेगा। नियमानुसार एक पेड़ काटने पर 10 लगाने होंगे। उसके लिए करीब आठ हेक्टेयर जमीन चाहिए। इनको काटने के बाद 10 गुना पेड़ लगाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। जमीन के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से एसडीएम दातागंज को पत्राचार किया गया था। करीब एक माह बीत जाने के बाद भी अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। इस वजह से पेड़ नहीं कटवाने और सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।
तार और खंभे शिफ्ट करने में खर्च होगा तीन करोड़
चौड़ीकरण के लिए बिजली के तार और खंभे शिफ्ट करने होंगे। इसको शिफ्ट करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने बिजली निगम के अधिकारियों से पत्राचार किया है। बिजली निगम ने शिफ्टिंग के लिए तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके अलावा वन विभाग को पेड़ कटाई व शिफ्टिंग के लिए 50 लाख रुपये दिया जाएगा।
पर्यावरण मंत्रालय से लेनी होगी अनुमति
चौड़ीकरण की जद आने वाले पेड़ की कटवाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय में अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने में भी समय लगेगे। ऐसे में निर्माण कार्य में और देरी होगी।
प्रोजेक्ट पर एक नजर
लागत- 82 करोड़
लंबाई- 27.20 किमी
चौड़ाई- तीन लेन (वर्तमान में स्टेट हाईवे दो लेन)
यूटिलिटी शिफ्टिंग- 3.50 करोड़
-आठ हेक्टेयर में लगाए जाने हैं पौधे
- बदायूं-दातागंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को काटा जाना है। इसकी जगह नए पेड़ लगेंगे। इसको लेकर एसडीएम दातागंज से पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है। - नरेश कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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पीडब्ल्यूडी की ओर से पौधे लगाने के लिए जमीन मांगी गई थी, लेकिन क्षेत्र में जमीन नहीं मिल पा रही है। लगातार जमीन ढूंढने का प्रयास चल रहा है। - धर्मेंद्र कुमार सिंह, एसडीएम, दातागंज