उसावां में काव्य गोष्ठी में मौजूद कवि, कविता पाठ करते हुए। संवाद
उसावां। हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए वयोवृद्ध कवि रामसहाय शूल के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी का शुभारंभ कवि महेश चंद्र मिश्र अग्निमुख की वाणी वंदना से हुआ।
गोष्ठी में विभिन्न विषयों पर कविताएं पढ़कर कवियों ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। शायर अब्दुल बहाव आजाद ने पढ़ा- चुनौती आंधियों को दे रहा है, मेरे आंगन में जो बूढ़ा शजर है। संतोष सिंह ने पढ़ा- भारत माता के बेटे हम,संकट से ना डरते हैं, लड़ना युद्ध अगर पड़ जाए कदम न पीछे धरते हैं। जगपाल जग ने सुनाया- थोड़ी खुशी की चाह थी गम के साए हो गए,अब तो अपने दिल के टुकड़े भी पराए हो गए। अमित अम्बर ने पढ़ा= शब्दों को अंगार बनाना पड़ता है, फूलों को भी खार बनाना पड़ता है, जब आती है आंच देश के दामन पर, कविता को हथियार बनाना पड़ता है।
अनंगपाल यादव ने सुनाया-गर्दन काटी है बेरहमी से, दोनों हाथ कटे हैं, जिसके टुकड़े-टुकड़े कर उसे ड्रम में है भर डाला। रामसहाय शूल ने पढ़ा मन के भावों की सरिता जब अपनी गति से बल खाती है, कविता को कवि लिखता है न, कविता खुद ही लिख जाती है। कवि रामानंद मिश्रा, रामनरेश यादव, म्याऊं से पधारे कवि शायर मुशीर अहमद ने भी काव्य पाठ किया। कवि गोष्ठी के अंत में महेश चंद्र मिश्रा अग्निमुख ने कविता पढ़कर सभी कवियों को धन्यवाद दिया। देर रात तक चले काव्य गोष्ठी में श्रोतागण कविताओं का रसास्वादन करते रहे।