-सड़कों और गलियों में हुआ जलभराव
शनिवार को दिन में रुक-रुककर हुई बारिश गेहूं और सब्जी की फसलों के लिए संजीवनी बन गई, जबकि पिछेती आलू में नुकसान होने की आशंका भी बढ़ा गई। बेमौसम बरसात ने आलू की फसल करने वाले किसानों के लिए फिर मुश्किल में डाल दिया है। माना जा रहा है कि बारिश से पिछेती आलू झुलसा रोग की चपेट में आ सकता है।
बरसात ने सबसे ज्यादा फायदा गेहूं और सब्जी फसलों को पहुंचाया है। किल्ले फूटने के बाद से ही कहीं पहली तो कुछ स्थानों पर दूसरी सिंचाई के लिए तैयार गेहूं की फसल पर बरसात ने अच्छी पैदावार के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। बरसात की वजह से सरसों में फिलहाल माहूं का खतरा भी टल गया है। हालांकि, ओलावृष्टि होने से शिमला मिर्च, टमाटर और सरसों बड़ा नुकसान हो जाएगा। कृषि वैज्ञानिक (पादप सुरक्षा) डॉ. संजय कुमार ने बताया कि आलू खेत में पकने को तैयार है। पौधे हरे हैं, लेकिन बरसात की वजह से पत्तियों पर पिछेती झुलसा रोग फैलने की आशंका बढ़ गई। बरसात होने पर ही आलू की फसल को पिछेती झुलसा रोग प्रभावित करता है। ज्यादा बरसात की स्थिति में खेत में पानी भरा तो आलू सड़ भी सकता है। इसके लिए जरुरी है कि आलू की फसल में किसान पानी नहीं भरने दें। खेत से पानी के निकास की व्यवस्था करने पर नुकसान कम होगा।
बिल्सी में ओलावृष्टि
बिल्सी। सुबह से रुक-रुक कर हुई बरसात से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बढ़ी ठिठुरन से लोग घरों में दुबके रहे। क्षेत्र के गांव सतेती, हैवतपुर, पहाड़पुर, वधौली, सिद्घपुर, खैरातीनगर में मामूली ओलावृष्टि भी हुई। इस बरसात क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे है। क्योंकि गेंहू की फसल को पानी मिल गया है। वहीं नगर की सड़कों पर गंदगी पसरी रही। लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
टमाटर-आलू पर पहले से ही रेट का संकट
उझानी। नोटबंदी के बाद सब्जियों के रेट में जिस तरह से गिरावट आई, उत्पादक पहले से ही परेशान हैं। नया आलू इन दिनों जहां महंगे में बिका करता था, वही इस वक्त फुटकर में पांच-छह रुपया प्रतिकिलो से ज्यादा नहीं बिक पा रहा है। टमाटर का भी ऐसा ही हाल है। बरसात से आलू को ज्यादा नुकसान हुआ तो उत्पादकों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा।
बर्फीली बूंदाबांदी से तीन डिग्री गिरा पारा
बदायूं। पहले कोहरा और गलन के बाद शनिवार सुबह हुई बर्फ जैसी ठंडी बूंदों वाली बारिश और बादल छाने की वजह से तापमान तीन डिग्री सेल्सियस गिर गया। सर्द हवा की वजह से हुई ठिठुरन ने लोगों की परेशानी को बढ़ा दिया। भीषण सर्दी होने से लोग कांपते हुए नजर आए। वहीं, बूंदाबांदी से शहर की सड़कों पर कीचड़ भी हो गया, जिससे फिसलन बढ़ गई।
बीते माह तक गुलाबी लगने वाली सर्दी ने अब सितम ढाना शुरू कर दिया है। सर्द हवा और गलन के साथ कोहरा सर्दी की भयावहता को बढ़ाने लगा है। शनिवार को सुबह से ही काले बादल छाने के साथ शीतलहर चल रही थी, जिससे लोग घरों के अंदर रजाइयों और कंबलों में दुबके रहे। बादल छाने के बाद नौ बजे के करीब हल्की बारिश हुई। बारिश की बूंदे बर्फ जैसी ठंडी लगने से लोग जहां के तहां रुक गए। दिन में सूर्यदेव के दर्शन न होने की वजह से लोगों को सर्दी का एहसास होता रहा। वहीं, शाम ढलने के बाद फिर से गलन तेज हो गई, जिससे लोग सर्दी से कांप गए।