पिछले दशक में तीन वर्षों तक आपदा प्रबंधक के लिए काम करने वाले आपदा प्रबंधन का कार्यालय जब से प्रदेश सरकार के अधीन हुआ, उसके स्टोर किए उपकरण ऐसे ही पड़े हैं। ऐसा यहां ही नहीं आपदा संभावित जिन जिलों में आपदा प्रबंधन कार्यालय हैं उन सभी में हैं। केंद्र सरकार का ध्यान जब इस पर गया तो सभी जिलों से अपनी वेबसाइट पर इसकी फीडिंग कराई है, ताकि वक्त पड़े इनका जिले के अलावा अन्य जिलों में उपयोग किया जा सके।
जिले को भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को लेकर हाईरिस्क जोन में रखा गया है। केंद्र सरकार ने यहां इस विभाग का नया भवन निर्माण कराकर कलक्ट्रेट में कार्यालय खुलवा दिया था। वर्ष 2005 से 2008 तक केंद्र सरकार ने इसका संचालन अपने हाथ में लिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार को सभी व्यवस्थाएं हवाले कर दी गईं। अब प्रदेश सरकार के राहत आयुक्त के अधीन यहां आपदा प्रबंधन कार्यालय का जिम्मा एडीएम वित्त राजेंद्र प्रसाद संभाल रहे हैं। इससे पूर्व भी एडीएम पर ही इसकी व्यवस्थाएं रहीं थीं। केंद्र सरकार पर आपदा प्रबंधन विभाग में एक डीपीओ मंत्रेश्वर पाठक नियुक्त किए गए थे। केंद्र से आने वाले कार्यक्रमों को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।
ये काम हो चुके हैं आपदा प्रबंधन में
- आपदा प्रबंधन कार्यालय के जरिए गांव-गांव सुरक्षा समतियां गठित हो चुकी हैं। सभी सुरक्षा समितियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- जिले में तमाम राज-मिस्त्रियों को भूकंपरोधी भवन बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- जिले में आपदा प्रबंधन का भवन और अन्य भवन भी भूकंपरोधी मॉडल पर ही बनवाए गए हैं।
- सूचना संपर्क और बचाव के लिए नए-नए प्रयोगों की जानकारियां भी दी गई हैं।
- बाढ़ और भूकंप के विनाश के समय काम आने वाले उपकरणों का भी संग्रह करवा दिया गया है।
विभाग की उपयोगिता पर उठने लगे सवाल
जिले में लगातार आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण और कार्ययोजनाओं को काम ठप पड़े होने का परिणाम है कि आगे कोई प्रगति नहीं हैं। लोगों में जागरूकता का अभाव होने लगा है। इससे इसकी उपयोगिता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
बचाव-सुरक्षा के सभी उपकरण हुए सूचीबद्ध
आपदा प्रबंधन कार्यालय के स्टोर में रस्सियां, सीड़ियां, जैकेट, तैरने की सहायक सामग्रियां, जैकेट, रोशनी को हैवी लाइटें आदि की सूचियां केंद्र की वेबसाइट पर डाल दी गई हैं।
बड़ी आपदाओं में सैनिक भी कर सकते हैं इसका उपयोग
यहां बता दें कि बाढ़ और मेलों के विशेष आयोजनों में सेना का सहयोग इस जिलें में भी लिया जाता रहा है। अचानक की स्थिति में सैनिकों को बचाव सामग्री की जरूरत पड़ती है तो यह सूची बेहद काम आएगी। इस सूची के जरिए आसपास के जिले से ही जरूरी उपकरण मिल सकेंगे।