जिन लोगों ने बीडीसी सदस्य पद के नामांकन में नामांकन पत्र पर दस्तखत किए थे। करीब तीन महीने के बाद निर्वाचित इन बीडीसी सदस्यों की नजर कमजोर हो गई और यह अंगूठा टेक हो गए। सभी मेंबर औसतन 40 साल के हैं। नजर भी इतनी कमजोर हो गई कि इनको ब्लाक प्रमुख पद के लिए मतदान को हेल्पर की जरूरत पड़ गई। तीन डॉक्टरों के पैनल ने भी इनको नजर से कमजोर घोषित कर दिया। गौर करने वाली बात यह है कि जिन बीडीसी की नजर कमजोर हुई वह सभी सालारपुर ब्लाक के हैं।
ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव में सत्ता पक्ष ने हर हथकंडा अपनाया। जिले में कुल 15 ब्लाक हैं। इनमें से 11 ब्लाकों में प्रमुख पदों पर सपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। जिन चार ब्लाकों में मतदान कराया गया वहां भी बीडीसी सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए हर हथकंडे अपनाया गया। सालारपुर ब्लाक में कुल 84 बीडीसी सदस्य हैं। यहां सपा की गेंदा देवी और निर्दलीय किरन देवी मैदान में थीं। रविवार को उझानी, इस्लामनगर, सालारपुर और वजीरगंज ब्लाक में प्रमुख पदों के लिए मतदान कराया गया।
गौर करने वाली बात यह है कि मतदान से एक दिन पहले सालारपुर ब्लाक के 60 बीडीसी सदस्यों की नजर कमजोर हो गई। शनिवार रात में ही एक माननीय की देखरेख में इन सभी को जिला अस्पताल लाया गया। मकसद था सभी को शारीरिक रूप से अक्षम दिखाकर मतदान के लिए हेल्पर मांगना। माननीय के दबाव में डॉ. हरपाल सिंह, डॉ. रियाज अहमद और डॉ. प्रवीना माहेश्वरी का तीन सदस्सीय पैनल बना दिया गया। बिना किसी जांच पड़ताल में इस पैनल ने 30 सदस्यों की नजर कमजोर घोषित कर दी। पूरा खेल एक विधायक के दबाव में हुआ। माननीय का मकसद यह था कि अगर कोई बीडीसी उनके चहेते प्रत्याशी से किनारा करता है तो वह उसके साथ हेल्पर के रूप में अपने गुर्गे को भेजकर मतदान करा सकते हैं। ताकि माननीय के चहेते की जीत सुनिश्चित हो सके। सालारपुर ब्लाक में 60 बीडीसी सदस्यों ने गेंदा देवी के समर्थन में वोट दिया। 22 ने किरन देवी को वोट दिया। दो वोट निरस्त किए गए। हालांकि हेल्पर का इस्तेमाल सिर्फ आठ सदस्यों ने किया।
-यह है व्यवस्था
मतदान के दौरान अगर कोई मतदाता शारीरिक रूप से अक्षम है तो उसे हेल्पर देने की व्यवस्था है। इसके लिए डॉक्टर के प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। वह मतदाता अपने हेल्पर के जरिए अपना मतदान कर सकता है।
प्रभारी सीएमएस डाॉ. अशोक कुमार गुप्ता का कहना है कि कुछ बीडीसी सदस्य शनिवार रात अस्पताल आए थे। इन सभी ने अपनी नजर कमजोर बताई। तीन डॉक्टर का पैनल बनाकर इनकी जांच कराई गई। सभी ने नजर कमजोर होने का दावा किया था। ऐसे में पैनल ने भी उनकी नजर कमजोर मानी।