गांवों में एक कहावत कही जाती है कि 'साल में तो घूरे के दिन भी बहुर जाते हैं। अब यह कहावत सच साबित होने वाली है, क्योंकि गांवों के घूरे से कंपोस्ट खाद बनाने की योजना पर तेजी के साथ काम किया जाएगा। अब इस योजना को मनरेगा से जोड़ दिया गया है। इस योजना का क्रियान्वयन सीधे ग्राम पंचायत द्वारा कराया जाएगा। गांवों में कंपोस्ट खाद के 957 गड्ढे मनरेगा के तहत खोदे जाएंगे।
अधिकांश गांवों में ग्रामीण कूड़े करकट को घर के पास या सड़क किनारे फेंक देते हैं। इससे गांवों की सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इन कूड़े के ढेरों से निजात पाने के साथ ही उस घूरे से खाद बनाने का काम ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाएगा। इससे पहले भी कूड़े से कंपोस्ट खाद बनाए जाने का काम किया जाता रहा, लेकिन इस बार मनरेगा के तहत कंपोस्ट खाद के गड्ढे खोदे जाएंगे। इन गड्ढों की लागत छह से सात हजार रुपये की बीच होगी।
गांव स्तर पर कंपोस्ट खाद बनने का दोहरा फायदा होगा, पहला तो गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर नहीं आएंगे। दूसरा यह कि किसानों को रासायनिक खादों से भी काफी हद तक छुटकारा मिल जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में मनरेगा योजना के तहत कंपोस्ट खाद के 957 गड्ढे खोदे जाएंगे। इस बारे में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और अन्य विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे। इसकी तैयारियां की जा रही हैं।
आरपी सिंह, मनरेगा उपायुक्त